कोंच(जालौन) अक्षय तृतीया पर घर में पूजा अर्चना करने के बाद गुड्डा – गुड़िया का विवाह किया गया। नगर व क्षेत्र में अक्षय तृतीया पर गुड्डा – गुड़िया का विवाह किया गया। बुन्देलखंडी भाषा में पुतरा पुतरिया का भी विवाह कहा जाता है, हालांकि कोरोना के मद्देनजर इस बार इस त्यौहार में एक दुक्का बच्चियां ही आकर गुड्डा – गुड़िया के लिए बरगद के पेड़ की पूजा कर विवाह सम्पन्न कराया। कई लोग घर पर ही बरगद की छोटी सी डाली ले गए और घर पर ही पूजा अर्चना कर विवाह सम्पन्न कराया। जहां प्रतिवर्ष इन त्यौहार पर जहां बच्चियों के साथ छोटे बच्चे और तो और महिलाएं भी बरगद के पेड़ को पूजने आती थीं फिर धूमधाम से गुड्डा गुड़िया का विवाह होता था लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी कोरोना वायरस के मद्देनजर नहीं हुआ। कुछ ही बच्चियां गुड्डा गुड़िया की पूजा अर्चना व विवाह करती देखीं गईं। इस दौरान छोटे बच्चे बच्चियां भी मुंह पर मास्क लगाए हुए थे।अक्षय तृतीया के अवसर पर अक्षय तृतीया के बारे में भागवताचार्य/श्रीरामकथा वाचक प्रियंका शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन का विशेष महत्व होता है। उन्होंने बताया कि आज के दिन मनुष्य जो भी पुण्य कार्य करता है वह अक्षय हो जाते हैं अर्थात उन पुण्य कार्यों को मिटाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दिन सभी लोग गौमाता की, देवी देवताओं की, संतों की पूरे मनोयोग से पूजा करें, सेवा करें व अर्चना करें और अक्षय पुण्य लाभ प्राप्त करें। प्रियंका शास्त्री ने बताया कि आज के दिन ही भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का प्राकट्य हुआ था। आज के दिन ही माँ गंगा का धरती पर आगमन हुआ था। उन्होंने बताया कि आज के दिन हर प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते है।

रिपोर्ट- नवीन कुशवाहा