हाथरस: अनजाने में ‘रिवर्स ऑनर किलिंग’

by saurabh

हाथरस के बूलगढ़ी गाँव में वाल्मीकि परिवार की लड़की का पड़ोसी ठाकुर लड़के से प्रेम था जिसका लड़की के परिवार वाले लगातार विरोध कर रहे थे। वैसे दोनों परिवारों में ज़मीन को लेकर 15 साल पुराना विवाद भी चल रहा था। लड़के ने लड़की को घटना से पहले एक मोबाइल भी गिफ्ट की थी और गाँव से 200 मीटर दूर एक खेत (जंगल नहीं) के पास मिलने के लिए सुबह 9:30 बजे बुलाया था। उसी समय लड़की की माँ और भाई भी वहाँ पहुँच गए और लड़की को पीटना शुरू कर दिया, उसके भाई ने तो गुस्सा में चुन्नी से उसका गला भी दबा दिया जो ज़रा ज़्यादा दब जाने के कारण अन्ततः जानलेवा साबित हुआ।

मतलब यह अनजाने में हुई ‘ऑनर किलिंग’ है जिसको ‘गैंग रेप के बाद हत्या’ बताकर उसका दोष लड़की के प्रेमी और मदद को दौड़े कुछ अन्य लड़कों पर मढ़ दिया गया। शायद इसीलिए लड़की के परिवारवाले न नारको टेस्ट चाहते हैं न सीबीआई जाँच। फिर वे क्या चाहते हैं? पहले तो सिर्फ लड़की के भाई और माँ को अनजाने में हुई हत्या के मामले से बचाना चाहते थे लेकिन अब इसमें ‘अर्थ’ भी जुड़ गया है जिस कारण वे ‘हिंदू तोड़ो मोमिन जोड़ो’ रणनीति वाली ‘फर्जी दलित-मोमिन एकता’ की आजमाई हुई स्क्रिप्ट पर ‘डायलॉग डेलिवरी’ कर रहे हैं। बार-बार बयान बदल रहे हैं। सनद रहे कि लड़की के प्रेमी और भाई दोनों हमनाम हैं यानी दोनों का एक ही नाम है।

दिलचस्प बात यह है कि गाँव वाले लड़की से कहीं ज्यादा उसके प्रेमी को इस ‘प्रेम के अपराध’ का जिम्मेदार मानते हैं लेकिन वे लड़की के परिवार वालों से खासे नाराज़ भी हैं। क्यों? क्योंकि लड़की की मदद को दौड़े कुछ लड़कों को भी उस ‘गैंगरेप के बाद हत्या’ का आरोपी बना दिया गया है जो हुई ही नहीं।

मामला गाँव की सामाजिकता की मर्यादा के उल्लंघन का भी है जिसका दोषी वे ‘प्रेमिका के परिवार’ और ‘प्रेमी’ दोनों को मानते हैं। अगर सिर्फ ‘ठाकुर प्रेमी’ को ही आरोपी बनाया गया होता तो उसकी ‘वाल्मीकि प्रेमिका’ के परिवार वालों को गाँव के अधिकतर ठाकुरों, ब्राह्मणों और वाल्मिकियों का समर्थन मिलता।


(नोट: दिन सोमवार तारीख 5 अक्टूबर शाम 4 बजे से 8:30 के बीच बूलगढ़ी में वाल्मीकि परिवार के पड़ोसियों से लेकर चौक-चौराहे तक के लोगों से हुई बातचीत के आधार पर।)

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