नयी दिल्ली: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव ने आज बताया कि कोरोना मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव की जांच में इसके कारगर न साबित होने पर परिषद ने इसके विकल्प के रूप में ‘हॉर्स सेरम’ या ‘एक्वाइन सेरम’ विकसित किया गया है और इसके क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी भी मिल गयी है।

डॉ .भार्गव ने स्वास्थ्य मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में आज बताया कि कोविड-19 के मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव का पता लगाने के लिए 22 अप्रैल से 14 जुलाई के बीच देशभर के 39 निजी और सरकारी अस्पतालों में 464 मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया।

प्लाज़्मा थेरेपी से नहीं मिल रहा है लाभ

इस परीक्षण में 350 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए। परीक्षण से यह पता चला कि कोरोना संक्रमण के मध्यम लक्षणों वाले मरीजों तथा गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी का कोई लाभ नहीं हुआ। इससे न ही कोरोना संक्रमण के कम गंभीर मामलों को गंभीर होने से रोकने में मदद मिली। इससे न ही कोरोना के कारण मौत के मामले में गिरावट आयी।

उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के इस संबंध किये गये शोध की समीक्षा हो चुकी है और इसे शोधपत्र के रूप में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजी) में प्रकाशित किये जाने की स्वीकृति मिल गयी है। यह शोध पत्र जल्द ही प्रकाशित होगा।

डॉ भार्गव ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी के कारगर न साबित होने के कारण विकल्प के रूप में ‘हॉर्स सेरम’ विकसित किया गया। इसका जानवरों पर परीक्षण हो गया है। अब इसके क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी भी मिल गयी है।

गौरतलब है कि यूएसएफडीए ने अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी के आपात इस्तेमाल की मंजूरी 28 अगस्त को दी थी। आईसीएमआर ने लेकिन प्लाज्मा थेरेपी संबंधी मुश्किलों तथा मरीजों पर इसके प्रभाव को देखते हुए अन्य विकल्प की तलाश शुरू कर दी थी। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से एक्वाइन एंटीसेरम को पृथक किया।

वार्ता