भारत में स्टीलबर्थ (stillbirth) के मामले सर्वाधिक हैं। दूसरे स्थान पर पाकिस्तान है। इसके बाद नाइजीरिया, कांगो, चीन और इथियोपिया में स्टीलबर्थ के मामले सर्वाधिक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टीलबर्थ के मामलों में सामाजिक, आर्थिक ,शैक्षणिक और भौगोलिक पहलू का महत्वपूर्ण योगदान है। कम आयवर्ग वाले देशों में हर 44वें बच्चों में एक बच्चा मृत पैदा होता है निम्न एवं मध्यम आयवर्ग वाले देशों में प्रति 58 में से एक बच्चा मृत पैदा होता है जबकि उच्च मध्यम आयवर्ग वाले देशों में 143 में से एक और उच्च आयवर्ग वाले देशों में 335 में से एक बच्चा मृत पैदा होता है।

उच्च आयवर्ग वाले देशों में भी जनजातीय अल्पसंख्यकों की पहुंच गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली तक नहीं रहती है। उदाहरण के तौर पर कनाडा में इन्यूट समुदाय में स्टीलबर्थ के मामले शेष कनाडा की अपेक्षा तीन गुना अधिक हैं। अमेरिका में अफ्रीकी अमेरिकी महिलाओं में श्वेत महिलाओं की अपेक्षा स्टीलबर्थ की संभावना दोगुनी अधिक है। गर्भवती महिला का शिक्षा का स्तर भी इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू है। कम पढ़ी लिखी महिलाओं में स्टीलबर्थ का खतरा दोगुना हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टीलबर्थ कई कारणों से होता है, जैसे ऑक्सीजन के स्तर में कमी, प्लैसेंटा संबंधी परेशानी, संक्रमण, भ्रूण विकास में समस्या आदि और इनमें से अधिकतर समस्याओं का निदान संभव है।

क्या होता है स्टीलबर्थ

“स्टीलबर्थ” का मतलब है गर्भावस्था के 28वें सप्ताह या उसके बाद गर्भस्थ शिशु की मौत। मां का स्वास्थ्य स्टीलबर्थ से जुड़ा होता है। निम्न एवं मध्यम आयवर्ग में मलेरिया, सिफलिस, एड्स और अन्य संक्रमणों के कारण स्टीलबर्थ अधिक होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक स्टीलबर्थ की दर में 35 प्रतिशत की गिरावट आयी है लेकिन इसकी गति काफी धीमी है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रहेगी तो अब से वर्ष 2030 तक दो करोड़ स्टीलबर्थ हो चुके होंगे। कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं तक गर्भवती महिलाओं की पहुंच में आ रही समस्याओं को देखते हुए इस बात की चिंता जतायी गयी है कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

WHO के प्रमुख टेड्रोस एडानांम गेबरिसस ने कहा कि बच्चे का जन्म किसी के लिए भी सबसे आनंददायक पल होना चाहिए लेकिन दुनिया में हर दिन हजारों माता-पिता अपने बच्चे के मृत पैदा होने का असहनीय दर्द उठाते हैं। स्टीलबर्थ के ये आंकड़े बताते हैं कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली कितनी जरूरी है और नर्स तथा मिडवाइफ के प्रशिक्षण में निवेश कितना जरूरी है।

वार्ता