लखीमपुर-खीरी ।पलिया कलाँ इंडो भारत- नेपाल सीमा पर स्थित भारतीय धरोहर विश्व प्रशिद्ध दुधवा नेशनल पार्क के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा है ,क्योंकि पड़ोसी मुल्क नेपाल के नागरिकों द्वारा दिन दहाड़े अन्धाधुन्ध पेड़ों की कटाई कर अपने देश ले जाने के चलते राष्ट्रीय संपदा पर गहरा शंकट मंडराने लगा है।इन सबसे बेपरवाह दुधवा में तैनात अधिकारी एवं कर्मचारियों राष्ट्रीय सम्पदा को बेच खाने में लगे हुए हैं। इंडो भारत -नेपाल की खुली सीमा पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की साठगांठ के संरक्षण में शिकार, कटान, मानव तस्करी, एवं जंगल क्षेत्र से अभयस्त अराजकतत्व अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं।

ज्ञात हो कि केंद्र व राज्य सरकार के लिए अति संवेदनशील माने जाने वाले दुधवा नेशनल पार्क को प्रथम महत्व देते हुए देश की सरकारें हर वर्ष करोड़ो रूपये का बजट पास करती है किंतु संवंधित विभाग के अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के चलते वैकल्पिक व्यवस्था एवं पड़ोसी मित्र राष्ट्र की समस्याओं को दर्शा कर अपनी जेबें गरम कर उच्चाधिकारियों तथा पूरे देश को गुमराह करने में लगे हैं, इनका उद्देश्य सिर्फ यही रहता है कि आम के आम गुठलियों के दाम मिला रहे है, इसी क्रम में गौरीफंटा रेंज में तैनात वनविभाग की फौज खुद ही शिकार, कटान, मानव तस्करी तथा अवैध कारोबार करने वाले तस्करो से मिल कर खुद तस्करी कराते हैं इस का उदाहरण तब देखने को मिला जब नेपाल के कुछ लोग जिनमें महिलाएं भी है जो भारतीय जंगल से लकड़ी ले जाते फोटो मे साफ़ दिख रही हैं, यही नही जंगल के सामने नेपाल की ढोका बाजार भी दिखाई दे रही है सबसे खास बात कि कुछ साल पहले भारतीय जंगल और जानवरो की सुरक्षा के लिए गौरीफंटा बाॅडर पर खाई खोदी गई थी जिसमें नेपाल के अराजकतत्व ने विरोध करते और भ्रम फैलाते हुए काम रुकवाने की पूर जोर कोशिश की लेकिन भारतीय अधिकारियों ने दोनो देशो की आपसी सहमती से जंगल के लिए वार्ता करने के बाद इस कार्य को पूरा किया। लेकिन कुछ साल तस्कर अराजकतत्व को काफी नुकसान पहुंचा लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते गए तस्करों ने जंगल की सुरक्षा के लिए खोदी गई खाई तारबंदी और खम्बो को गिरा कर अराजकतत्वों ने आने जाने का रास्ता बना लिया। इसके साथ ही भ्रस्टाचार के आकण्ठ में डूबे संबंधित विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर शिकायत कर्ता से साक्ष्य मांगने के नाम पर उत्पीड़न करते हैं जिससे विभागीय गोलमाल की पोल न खुल सके।कमोबेश यही स्थिति सम्पूर्णानगर वन रेंज के उन बीटों का है जो नेपाल सीमा से लगते हैं।इस रेंज क्षेत्र का हिस्सा जो सालों पहले कभी बहुत घना दिखता था ,परन्त आज नेपालियों द्वारा बेरोकटोक अन्धाधुन्ध भारतीय वन संपदा को चीर हरण किया जा रहा है,परन्तु जिम्मेदार आँखे बंद कर अपना पेट भरने में लगे हुए हैं।

रिपोर्ट-गोविन्द कुमार