जालौन के पत्रकार पुलिस की दमनकारी और उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के लगातार शिकार हो रहे हैं, जिसको लेकर जालौन के पत्रकारों में रोष है। पुलिस के खिलाफ व कोरोना की सच्ची खबरें दिखाने के बाद जिला प्रशासन पत्रकारों से खफा हो गया है जिसके बाद पत्रकारों के खिलाफ पुलिस ने मकद्दमा लिख लिया, जिसके विरोध में जालौन के पत्रकार एक जुट हो गये, जिन्होने उरई के कलेक्ट्रेट में अपने मोबाइल व कैमरे को जमीन पर रखकर धरना प्रदर्शन किया, साथ ही जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पत्रकारों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की है।
उरई के कलेक्ट्रेट में उपजा के जिला महामंत्री मनोज राजा के नेतृत्व में मयंक राजपूत, मयंक गुप्ता, संजय गुप्ता, विनय गुप्ता,अजय श्रीवास्तव,
प्रदीप त्रिपाठी,मुबीन खा,अकील अहमद, इसरार खान, श्याम बिहारी आशीष शिवहरे, नितिन कुमार, विशाल वर्मा अलीम सिद्धकी, विक्की परिहार सहित कई पत्रकारों ने धरना प्रदर्शन किया। जहां उन्होंने जमीन पर अपने मोबाइल कैमरे रखकर काम बंद किया और जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन को ज्ञापन देते हुये बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा पत्रकारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे पत्रकारों पर दबाव बनाया जा सके। सभी पत्रकारों ने डीएम को अवगत कराते हुए बताया कि विगत दिवस उरई के मंडी चौकी इंचार्ज रहे अभिषेक सिंह के कारनामों की अखबारों में खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद उरई कोतवाली पुलिस द्वारा कई पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया, जो कि सीधे तौर पर पत्रकारों को दबाव में लेने का प्रयास किया है। इसके अलावा कालपी के मंगरौल में पत्रकार अवधेश बाजपेई, रामपुरा के पत्रकारों और उरई के पत्रकार साथियों पर पुलिस मामले दर्ज कर चुकी है, तो वहीं सीओ सिटी संतोष कुमार द्वारा मीडिया कवरेज के दौरान पत्रकार साथियों द्वारा बनाये गए वीडियो को सीओ द्वारा मोबाइल छीन कर वीडियो डिलीट करा दिया था, जो सीधे तौर पर पत्रकारों का हनन है, जिससे पत्रकारों में गहरी नाराजगी है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि पत्रकार अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन पुलिस अधिकारी लगातार पत्रकारों को प्रताड़ित कर रहे हैं, जबकि कोरोना काल में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर खबर बना रहा है और जनता के सामने सही जानकारी दे रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री द्वारा भी पत्रकारों को सम्मान देने की बात कही जा रही है, फिर भी इसके बावजूद भी पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है, यदि किसी भी पत्रकार के खिलाफ अनावश्यक रूप से मुकदमा दर्ज कराया गया, तो पत्रकार इसके खिलाफ आंदोलित हो जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

रिपोर्ट- नवीन कुशवाहा