कानपुर। कानपुर के मेट्रो सिटी बनने की उल्टी ​गिनती शुरू हो गई है। 15 नवंबर 2019 से शुरू हुए प्राथमिक कारीडोर का काम लगभग 2 साल बाद नवंबर में पूरा होने वाला है। इसी के साथ प्राथमिक कारीडोर पर चलने वाली ट्रेन का पहला सेट गुजरात से कानपुर के लिए रवाना भी हो चुका है जो तकरीबन 10 दिन बाद सड़क के रास्ते से होता हुआ कानपुर पॉलिटेक्निक स्थित डिपो पहुॅच जायेगा।

गुजरात से रवाना होने से पहले ट्रेन के बाहर और अंदर की तस्वीरें मीडिया के साथ साझा की गई है। बाहर से ट्रेन का रंग ग्रे रखा गया है जिसमें नारंगी रंग की एक लाइन नीचे की तरफ डाली गई है, जबकि छत के पास का रंग काला है। यह तीन रंग का संयोजन ट्रेन का बहुत ही आकर्षक बनाता है।
इसके साथ ही अंदर की तस्वीरे भी जारी की गई है। अंदर लाइट कलर के साथ सफेद रंग की एलईडी लाइट लगाई गई है। दोनो तरफ बैठने के लिए मेटल की सीटें है, जबकि ज्यादा भीड़ को संभालने के लिए बीच में खड़े होकर यात्रा करने के लिए अच्छी खासी जगह ही गई है।

प्राथमिक कारीडोर : 9 किलोमीटर में बने 9 स्टेशन

कानपुर में मेट्रो आने के साथ ही शहर का सार्वजनिक यातायात व्श्विस्तरीय हो जायेगा। पहले चरण में प्राथमिक कारीडोर में यह ट्रेन चलाई जायेगी। इस कॉरिडोर में तीन तीन डिब्बे की आठ ट्रेनें चलाई जायेंगी। प्राथमिक कारीडोर आइआइटी से मोतीझील के बीच में है, जिसमें नौ स्टेशन हैं।

यह खूबिंयाँ बनायेंगी ट्रेन का खास

कानपुर मेट्रों कुछ ऐसी खास तकनीकि से लैस होगी , जो इस आम आदमी की सवारी को खास बना देगी। ट्रेन की खासियत के मुख्य बिन्दु :—

1- ट्रेन की स्पीड इसे खास बनाती है। यह ट्रेन 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चलने में सक्षम होगी।

2— ट्रेन में सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किये गये है। पूरी ट्रेन सीसीटीवी कैमरे से लैस होगी, जिससे हर गतिविधी पर नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही दिव्यांगों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह होगी। व्हीलचेयर के स्थान के पास ‘लांग स्टाप रिक्वेस्ट बटन’ होगा, जिसे दबाकर दिव्यांग ट्रेन आपरेटर से दरवाजा खुला रखने के लिए रिक्वेस्ट कर सकेंगे।

3— ट्रेन में ऊर्जा संरक्षण के लिए विशेष तैयारी की गई है। जिसकी मदद से ट्रेनों में लगने वाले ब्रेक से 45 पीसद तक ऊर्जा को रीजेनरेट करके फिर से सिस्टम में इस्तेमाल कर लिया जाएगा।

4— इन ट्रेनों में कार्बन-डाई-आक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम होगा, जो ट्रेन में मौजूद यात्रियों की संख्या के हिसाब से चलेगा और ऊर्जा की बचत करेगा।

5— मौजूदा समय में मोबाइल की जरूरत को समझते हुए मेट्रो में 56 मोबाइल चार्जिग प्वाइंट दिये गयें है। इसके साथ ही 36 इंफो एलसीडी पैनल लगे होगें।