कम उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे में झूल गए करतार

by shubham

हमीरपुर: वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अंतर्गत जरा याद करो कुर्बानी के तहत गदर आंदोलन के अग्रेता करतार सिंह सराभा की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानीदीन ने कहा कि करतार सिंह सराभा वास्तव में एक युवा क्रांतिवीर थे, जिन्होंने मात्र साढे उन्नीस वर्ष के अपने जीवन को देश के लिए अर्पित कर दिया । वास्तव में करतार सिंह सराभा गदर आंदोलन के अग्रेता थे । इनका जन्म 24 मई 18 96 को पंजाब लुधियाना के सराभा गांव में हुआ था। पिता का नाम मंगल सिंह था तथा मा का नाम साहिब कौर था ।

करतार सिंह की प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना के स्कूलों मे हुई , उसके बाद इन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय मे प्रवेश लिया, अमरीका मे इनका लाला हरदयाल , सोहन सिंह भकना और मेडम कामा से भेट हुई।कनाडा और अमरीका मे करतार को गुलामी के दुखद अनुभव हुये , ऐसे हालात में उन्होंने देश की आजादी के लिए काम करने का प्रण किया ।1913 मे गदर दल बना, करतार अध्यक्ष बने ,भारत आकर करतार ने पूरे देश में सैनिकों को गोरो के खिलाफ होने का अभियान छेड़ा , 21 फरवरी 1915 को पूरे देशमे गदर की योजना बनी , किन्तु देशद्रोही कृपाल सिंह के द्वारा भेद खोल देने से यह महान योजना विफल हो गयी , करतार और उसके साथी पकडे गये |

मजदूर ने फांसी लगाकर दी जान, पुलिस ने नहीं कराया पोस्टमार्टम

सराभा को अन्य देशवीरो के साथ16 नवम्बर 1915 को लगभग उन्नीस वर्ष की उम्र मे फांसी पर लटका दिया गया।इस युवा देशभक्त के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है । अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, राजकुमार सोनी, कल्लू चौरसिया, वृन्दावन गुप्ता, सचिन,अरविंद, रामगोपाल , संजय सोनी, अजय गुप्ता और सौरभ कसौधन शामिल रहे।

Related Posts