कानपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर उर्सला अस्पताल के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें जिलाधिकारी ने फीता काटकर गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस साल “दयालुता” थीम के साथ मनाया जा रहा यह दिवस।

आज आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ी हैं। लोग जरा-जरा सी बातों पर अपने जीवन का अंत कर रहे हैं, जो कि बहुमूल्य है। हमें इस प्रवृत्ति से उबरना है। अपने आस-पास इस बात पर गौर करें कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति उनके बीच है जो तनाव का शिकार है। ऐसे लोगों की समय से काउंसिलिंग हो जाए तो उनके जीवन को बचाया जा सकता है। आत्महत्या के ख्याल को दिल से निकालकर जिंदगी जीने पर ध्यान लगाएं क्योंकि जीवन अनमोल और बहुमूल्य है। यह बातें जिलाधिकारी ने उक्त बातें संगोष्ठी में कहीं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की जनपदीय इकाई द्वारा यह आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने लोगों को दौड़भाग भरी जिंदगी में कुछ वक्त अपने लिए निकालने और तनावमुक्त जीवन जीने की कला सीखने पर जोर दिया। साथ ही उन्हें योगा और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की। इस मौके पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.महेश कुमार ने संगोष्ठी का संचालन किया। डॉ कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य की परिभाषा है कि मनुष्य शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से स्वस्थ हो। केवल बीमारी का न होना इस बात का प्रतीक नहीं है कि व्यक्ति स्वस्थ है। उसे मानसिक एवं सामाजिक रूप से भी स्वस्थ होना जरूरी है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ ने विश्व के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को यथार्थवादी बनाने के लिए वर्ष 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की स्थापना की थी। कोरोना काल में एक तरफ जहां हर किसी के मनोदशा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वहीं, इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर बच्चे, बुजुर्ग समेत सभी वर्ग के लोगों में कोरोना के डर और भय को कम करने का दयालुता भाव थीम पर प्रोग्राम का आयोजन किया गया है।

मनोचिकित्सक डॉ कलीम अहमद ने कहा कि विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के सहयोगात्मक प्रयासों को संगठित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में मरीजों की तादाद जहाँ बढ़ी है वहीं, हर वर्ग कहीं न कहीं मानसिक अवसाद का सामना कर रहा है। ऐसे में उनके बीच निगेटिविटी को कम करने और मानसिक समस्या को दूर करने के लिए सभी की दयालुता की ज़रूरत है।

इस अवसर पर निदेशक , अपर निदेशक , मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, कार्यक्रम अधिकारी डॉ चिरंजीव प्रसाद , समस्त अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई के सभी सदस्यों सहित अन्य स्वास्थकर्मी मौजूद रहे।

मानसिक विकार के लक्षण –

चिंता-उलझन में रहना। नींद नहीं आना। स्वयं से बातें करते रहना। अपने आप में रहना और रोना। दैनिक क्रियाकलापों को करने में कठिनाई। अकेले रहना। कभी रोना, बहुत ज्यादा गुस्सा करना। भ्रम करना, तनाव महसूस करना, एकाग्रता में कमी, नशा की लत पड़ना। भूलने की बीमारी, याददाश्त का कमजोर होना। अगर इनमें से कोई भी कारण आपमें हैं तो आपको परामर्श और इलाज की आवश्यकता है। जिलाधिकारी द्वारा जागरूकता हस्ताक्षर बैनर पर सिग्नेचर कर संदेश लिखा गया।

  • कौस्तुभ शंकर मिश्रा