परम्परागत मार्ग से निकली बाबा महाकाल की सवारी

by shubham

उज्जैन: कोविड संक्रमण के चलते पूर्ण अन लॉक की स्थिति में लंबे अन्तराल के बाद महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की कार्तिक माह की पहली सवारी सोमवार को परपरा गत मार्ग से निकली। बहुत से स्थानों पर श्रद्धालुओं ने आल्हादित हो, अश्रु धारा बहाते हुए बाबा के दर्शन किये। सवारी निकलने के पूर्व सायं 4 बजे महाकाल मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्ववर का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। पूजन-अर्चन पं. आशीष पुजारी द्वारा प्रशासक नरेन्द्र सूर्यवंशी की उपस्थिति में किया गया. सहायक प्रशासक, मूलचंद जूनवाल, प्रतीक द्विवेदी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आर.पी. गेहलोत, आर.के.तिवारी आदि उपस्थित थे।

सभा मंडप में पंडित विशाल राजोरिया व अधिकारी गण ने जैसे ही पालकी उठाई, सभा मंडप बाबा के जयघोष से गूंज उठा। सवारी जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची पालकी में विराजित श्री चन्द्रंमौलेश्वर भगवान को सशस्त्र बल द्वारा सलामी दी गई। तत्पश्चात सवारी नगर भ्रमण पर निकली।
सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट क्षिप्रातट पहुंची। वहां पर भगवान महाकाल का क्षिप्रा के जल से जल अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई।सवारी के आगे घुड़सवार दल, मधुर भजन संगीत गुंजित करता पुलिस बैंड सवारी की शोभा बढ़ा रहे थे।

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पूजन-अर्चन के बाद भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोड की धर्मशाला कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यसनारायण मंदिर ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होते हुए पुन: महाकाल मंदिर पहुंची भगवान महाकाल की सवारी में आगे-आगे तोपची तोप छोडते हुए बाबा के नगर भ्रमण का सन्देश दे रहे थे।
प्रशासन द्वारा चुस्त दुरुस्त व्यवस्था, सजग पुलिस बल, नगर निगम, पी डब्ल्यू डी, स्वास्थ्य विभाग आदि सभी
मुस्तेदी से कार्यरत रहे। व्यवस्था में जगह जगह भौतिक दूरी बनाए रखना, मास्क की अनिवार्यता आदि सभी सावधानियां रखी गयी।

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