नई दिल्ली। कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसान संगठन के 32 सदस्यों की सरकार के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हो गई।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के किसान नेताओं से बात की और श्री योगेंद्र यादव को इस बैठक में शामिल नहीं करने का आग्रह किया। इस पर किसान संगठनों ने वार्ता का बहिष्कार करने का फैसला किया लेकिन श्री यादव को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने स्वयं बैठक में शामिल होने इनकार कर दिया।

बैठक में शामिल होने से पहले संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि उनकी सरकार के साथ बातचीत तभी संभव हो पायेगा जब उनके साथ सर्वश्री योगेंद्र यादव, हन्नान मोल्ला, शिव कुमार कक्काजी तथा गुरनाम सिंह चादुनी को बैठक में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।

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योगेंद्र यादव ने कहा कि बातचीत महत्वपूर्ण है इसलिए उनकी वजह से वार्ता को रोकना सही नहीं है। उन्होंने किसानों नेताओं से कहा कि बिना उनके बारे में सोचे अपना निर्णय लें।

गौरतलब है कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देर रात किसान संगठनों को एक दिसंबर को अपराह्न तीन बजे विज्ञान भवन, नयी दिल्ली में बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में उन सभी संगठनों को निमंत्रण दिया गया है, जिन्हें पिछली बैठक में बुलाया गया था। पुलिस की सुरक्षा में दो बसों में किसान नेताओं को बैठक स्थल पर लाया गया।

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5 जून 2020 को सरकार ने किसानों के लिए तीन अध्यादेश पारित किया था। किसानों के लिए आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020, कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य ( संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 और मूल्य आश्वाशन पर किसान ( बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा बिल, विधेयक 2020 लाए गए थे। इस अध्यादेश के आते ही विपक्ष और किसान जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन्पुट- यूनीवार्ता