कानपुर: चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर (CSA) के तिलहन अनुभाग में संचालित अखिल भारतीय अलसी शोध परियोजना अंतर्गत अलसी की नई प्रजाति अपर्णा (एलसीके 1611) अलसी अभिजनक डॉक्टर नलिनी तिवारी एवं उनकी टीम के सहयोगी वैज्ञानिक डॉक्टर नरेंद्र सचान तथा डॉ मिर्जा फैयाज हुसैन द्वारा विकसित की गई है।

अलसी अभिजनक डॉक्टर नलिनी तिवारी ने बताया कि कृषि सहकारिता एवं कृषि कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली में उप महानिदेशक डॉ टीआर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समिति की 85 वी बैठक में अधिसूचना (नोटिफिकेशन) किया गया है। डॉक्टर तिवारी ने बताया कि इस प्रजाति का लगातार 3 वर्षों तक परीक्षण उपरांत राष्ट्रीय चेक में अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 20% अधिक उत्पादन प्राप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति सिंचित दशा के लिए विकसित की गई है। तथा यह प्रजाति 135 दिन में पक कर तैयार हो जाती है ।

22 कुंटल प्रति हेक्टेयर है उपज छमता

उन्होंने कहा कि इस प्रजाति की उपज छमता 22 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति मुख्य रूप से झुलसा एवं गेरुई रोक के प्रति सहिष्णु है। इसमें तेल की मात्रा 39% तक होती है उन्होंने कहा कि इसमें ओमेगा थ्री एवं लिग्निन भी पाया जाता है। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि इस प्रजाति में कलिका मक्खी कीट नहीं लगता है। विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉक्टर एचजी प्रकाश ने बताया कि इस नवीन प्रजाति अपर्णा( एल सी के 16 11) का बीज कृषकों को बुवाई हेतु इस वर्ष से उपलब्ध कराया जाएगा।

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जिससे अलसी उत्पादक किसान भाई लाभान्वित होंगे। निदेशक शोध ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अलसी का क्षेत्रफल लगभग 30 हज़ार हेक्टेयर है तथा प्रदेश का उत्पादन 19 हजार टन है एवं प्रदेश की उत्पादकता 6.18 कुंतल प्रति हेक्टेयर है जबकि देश की उत्पादकता 5.74 कुंतल से अधिक है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ खलील खान ने बताया कि कुलपति डॉ डीआर सिंह ने अलसी की अपर्णा प्रजाति को विकसित करने वाली वैज्ञानिक टीम डॉक्टर नलिनी तिवारी, डॉक्टर नरेंद्र सचान एवं डॉक्टर मिर्ज़ा फैयाज हुसैन को बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा कहा है कि यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह प्रजाति कृषि क्षेत्र में राष्ट्र के विकास में अहम योगदान अदा करेगी।