आज कल लोगो की मानसिकता पुलिस के प्रति बदलती जा रही है | लेकिन किसी ने कभी ये सोचा है | कि आखिर क्या करे पुलिस जब कोई अपराध होता है तो लोग बोलते है | कि पुलिस सोयी हुई है | और तो और जब सड़क पर जाम लगा रहता है तो भी लोग पुलिस को ही जिम्मेदार ठैराते है |

एम्बुलेंस जब जाम में फांसी हो तो जिम्मदार कौन……?

शायद ही कोई शहर ऐसा होगा जहा जाम देखने को न मिले और जाम जब लगता है | तो अक्सर सभी प्रकार के बाहन उसमे फसे दिखते है | और जाम में अगर लगा तो भी पुलिस कि गलती होती है | और तो और अगर कही गलती से एम्बुलेंस उस जाम में फंस गयी तो कुछ लोग जाम में फँसी एम्बुलेंस की फोटो लेकर सोशल मीडिया में ऐसे शेयर करते है| जैसे उन्होंने बहुत बड़ा किला फ़तेह कर लिया हो | और यहाँ भी पुलिस को ही जिम्मदार बताया जाता है| लेकिन कभी किसी ने सोचा है की जाम पुलिस की गलती से लगता है या जाम में फसे किसी जल्दबाज़ की जलती से लगता है | और तो और जो लोग जाम की फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जाम में फांसी एम्बुलेंस को दिखते है कभी उन्होंने ये सोचा है कि वो खुद उस एम्बुलेंसको जाम से निकलवा दे |

आखिर क्या करे “ट्रैफिक पुलिस”

जब एक ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी दिन भर सर्दी,गर्मी,बरसात को बिना देखे शहर के ट्रैफिक का संचालन करता तब भी कुछ लोग नियमो धज्जिया उड़ाते है| और जल्दी के चक्कर में ट्रैफिक जाम कर देते है| और तो और जब उनको उनकी गलती बताई जाती है तब वो नवाब के रिश्तेदार होते है| और उनको टोकन पर भी जिम्मेदार पुलिस ही होती है| सबको दूसरो को दोष देना तो अच्छे से आता है लेकिन कभी उन्होंने अपने को देखा है कि वो आखिर कितने साफ है जो दूसरो को गलत बताते है|

कोरोना कल में पुलिस का कार्य

पूरा देश जब बंद था | तब पुलिस सड़को पर थी बहुत से ऐसे कर्मचारी थे जिनकी ड्यूटी ऐसी जगह लगी थी | जहा पर न तो कुछ दिन भर खाने को था और न ही पीने को पानी था | और तो और बहुत पुलिस कर्मचारियों को तो पैदल जाना पड़ता था जहा उनकी ड्यूटी लगी होती थी |

फिर भी लोगो की मानसिकता पुलिस के प्रति क्या थी | की पुलिस डंडा चला रही है| उन लोगो से मेरा एक सवाल है कि आप करने क्या गए थे जो आपकी पिटाई हुई | और अगर बही पुलिस लोगो को लॉक डाउन में घूमने से न रोकती तो लोग कहते पुलिस कुछ कर नहीं रही है | आखिर फिर क्या करे पुलिस जब दोनों तरफ से गलती लोगो को पुलिस की ही लगती है |

दुकान खुली तो पुलिस जिम्मेदार और बंद कराई तो पुलिस जिम्मेदार

कोरोना ठीक से ख़तम भी नहीं हो पाया था | और एक नयी वीमारी ने दस्तक देदी बर्ड फ्लू जिसमे ऐतिहातन मांस की दुकाने बंद करई जा रही है जिससे बीमारी बढ़ न सके | लोगो इस पर भी बिना किसी को जिम्मेदार ठैराये कैसे रह सकते है | अब अगर कही मांस की दुकान खुली दिखी तो पुलिस की लापरवही हैं | और अगर पुलिस ने दुकान को बंद करा दिया तो, लोग कहते है की गरीब को जीने नहीं देती……

आखिर अब क्या करे पुलिस जब लोगो को दोनों तरफ से ही गलती पुलिस की ही लगती है | कभी किसी ने ये सोचा है की पुलिस कोई अलग से नहीं आती| एक दिन अगर आपको एक चौराहे की ट्रैफिक वस्वस्था संभालने को बोल दिया जाये तब पता चलेगा की जिम्मेदारी क्या होती है | आरोप लगाने और काम करने में बहुत बड़ा फर्क होता है | सोच को बदलो पुलिस आपने आप बदली नजर आएगी |

रिपोर्ट :- वैभव तिवारी