कौशाम्बी :- जिला अस्पताल मंझनपुर विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है जिला अस्पताल में व्याप्त समस्याओं से मरीज परेशान है शासन के निर्देश पर आए दिन जिला अस्पताल का निरीक्षण प्रमुख सचिव नोडल अफसर से लेकर जिला अधिकारी के द्वारा किया जाता है लेकिन निरीक्षण के नाम पर पूर्व से सूचना मिल जाने के चलते अधिकारियों के आने से पूर्व ही स्थितियां सुधार ली जाती हैं।

निरीक्षण में आए अधिकारियों के जाने के बाद फिर जिला अस्पताल की स्थिति बदतर हो जाती है यह खेल बीते 3 वर्षों से चल रहा है लेकिन शासन-प्रशासन जिला अस्पताल की चौपट व्यवस्था से बेखबर है आखिर केवल निरीक्षण के नाम परिस्थितियों को सुधारने से मरीजों को कैसे जिला अस्पताल से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिलेगा।

पूरे दिन मरीज और उनके परिजन जिला अस्पताल में दर-दर भटकते दिखाई देते हैं लेकिन मरीजों की समस्या का समाधान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक भी नहीं कर पाते हैं लंबे समय से जमे मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल की व्यवस्था को संभाल पाने में पूरी तरह से फेल हैं इलाज ना मिलने से मरीज प्राइवेट अस्पताल की ओर भाग रहे हैं।

जहां मरीजों से एक तरफ जमकर धन की वसूली होती है निजी अस्पतालों में आप्रशिक्षित चिकित्सकों के चलते मरीजों की मौत का सिलसिला भी तेजी से बढ़ा है लेकिन जिला अस्पताल में चिकित्सकों और विभिन्न सुविधाओं की कमी होने के चलते मरीज मजबूरी में निजी अस्पताल जा रहे हैं जिला अस्पताल की हालत यह है।

कि वहां लाइट ना होने पर किसी प्रकार की जांच का काम नहीं होता जिससे मरीज परेशान होते हैं और उनका इलाज समय से नहीं हो पाता मरीजों को समय से इलाज ना मिल पाने से उनकी मौत हो जाती है लंबे समय से जिला अस्पताल का जनरेटर खराब है जनरेटर मरम्मत के नाम पर कई बार फर्जी बिल वाउचर लगाकर सरकारी खजाने से रकम निकाली जा चुकी है।

लेकिन जनरेटर की मरम्मत ठीक ढंग से नहीं होती जिला अस्पताल की स्थिति इतनी बदतर है कि मलेरिया टाइफाइड लिवर की जांच का इंतजाम जिला अस्पताल में नहीं है केवल सीबीसी की जांच कर मरीजो के साथ औपचारिकता निभाई जा रही है लंबे समय से जमे जिला अस्पताल में जमे सीएमएस दीपक सेठ को अधिकारियों और नेताओं को खुश रखने में महारत हासिल है जिसके चलते तैनाती स्थल पर एक निर्धारित हद से ज्यादा बीत जाने के बाद भी इनका स्थानांतरण स्वास्थ्य महकमे ने अन्य जनपद नहीं किया है जो स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल है।


रिपोर्ट श्रीकांत यादव