फ्री के चाय पीने वाले पुलिस वाले बेईमान दुकान मालिक का कर देते हैं सहयोग

by vaibhav

कौशांबी :; आजादी के बाद अब भी बधुआ मजदूरी की प्रथा समाज में कायम है तरीके जरूर बदल गए हैं लेकिन काम करने वाले लोग अब भी अपने को बंधुआ मजदूर ही समझते हैं बंधुआ मज़दूरी के मजदूरों का शोषण करने का एक ताजा मामला मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र के ओसा नहर के पास की एक मिठाई की दुकान का प्रकाश में आया है

इस मिठाई की दुकान में मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र के गौसपुर टिकरी गांव निवासी पप्पू केसरवानी मिठाई बनाने के कारीगर है और इसी दुकान में मिठाई बना कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं लेकिन आठ महीने उनसे कारीगरी का काम कराने के बाद मजदूरी की रकम मांगने पर उन्हें भगा दिया गया इस दुकान के दबंग मालिक संजय पाल मनीष पाल की स्थिति इतनी खराब है कि वह कारीगरों मजदूरों से काम कराने के बाद उन्हें डांट डपट कर दबंगई दिखाकर दुकान से भगा देते हैं अब तक दर्जनों कारीगर मजदूरों से काम कराने के बाद उनकी मजदूरी नही दी गयी है क्योंकि इस दुकान में कुछ पुलिस वाले आए दिन बैठते हैं वह फ्री की चाय पीने को पा जाते हैं जिससे फ्री के चाय पीने वाले पुलिस वाले बेईमान दुकान मालिक का सहयोग कर देते हैं जिसके चलते दुकान मालिक गुंडा बन चुका है आए दिन शराब पी कर अभद्रता करने वाला यह दुकान दार अब इसी गुंडई के बल पर दुकान में काम कराने के बाद मजदूरों कारीगरों का भुगतान नहीं देना चाहता पप्पू सहित इलाके के तमाम लोग इस दुकान में बंधुआ मजदूरों की तरह काम करने के बाद अपनी मजदूरी का भुगतान नहीं पा सके दुकान मालिक से त्रस्त होकर पप्पू ने पुलिस थाना से लेकर पुलिस कप्तान कार्यालय फरियाद किए लेकिन दुकान संचालक की चाय पीकर उसका जयकारा लगाने वाली वर्दी ने अभी तक बंधुआ मजदूरी करवाने वाले संजय पाल और मनीष पाल के नाम मुकदमा दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी नहीं की है जिससे मिठाई दुकान के मालिकानों के हौसले बुलंद हैं आखिर बंधुआ मजदूरी की प्रथा कब समाप्त होगी यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है

रिपोर्ट श्रीकान्त यादव

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