कानपुर :- उत्तर प्रदेश में 12 सीटों वाली सबसे बड़ी विधानसभा क्षेत्र प्रयागराज के बाद अगर देश की नजर किसी विधानसभा क्षेत्र पर रहती हैं तो वो है प्रदेश का कानपुर विधानसभा क्षेत्र.. जहां की 10 सीटें ये तय करती हैं कि सत्ता की चाबी किसके हाथों में होंगी? और कौन विपक्ष में बैठकर 5 साल सत्ता का वनवास झेलेगा.. 2022 यूपी विधानसभा का चुनाव जैसे- जैसे करीब आ रहा है.. कानपुर में सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है.. एक वक्त में मजदूरों का शहर देश का मैनचेस्टर कहा जाता था जिसकी सत्ता ‘हाथ’ (कांग्रेस) के पास थी.. लेकिन मंडल और कमंडल की राजनीति ने देश की राजनीति की दिशा और दशा को ऐसा बदला की कानपुर कांग्रेस के हाथ से निकलता चला गया और बीजेपी का कमल खिलता गया.. अब 2022 की रणभेरी बजने से पहले सियासी दलों ने कानपुर को चुनावी दंगल बना दिया है.. इसी कड़ी में सामजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव 2022 के लिए चुनावी बिगूल कानपुर से फूंक दिया है.. सभी सियासी दल जिले की 10 सीटों का पूरा गुणा- गणित समझने में जुट गई हैं

1- बिल्हौर विधानसभा सीट-209
कानपुर की बिल्हौर विधानसभा सीट पहले लोकसभा सीट हुआ करती थी। 2009 लोकसभा चुनाव में हुए परिसीमन के बाद बिल्हौर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई थी। परिसीमन के बाद बिल्हौर लोकसभा सीट का बड़ा हिस्सा टूट कर अकबरपुर लोकसभा सीट में चला गया था। बिल्हौर विधानसभा सीट आरक्षित है, इसे ग्रामीण परिवेश की सीट कहा जाता है। बिल्हौर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक एससी और ओबीसी वोटरों की संख्या है। इसके बाद मुस्लिम और जनरल वोटर आते हैं। विधानसभा चुनाव 2002 में समाजवादी पार्टी के शिव कुमार बेरिया, साल 2007 में बसपा के कमलेश चंद्र, विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी से पार्टी से अरूणा कोरी ने जीत दर्ज की थी तो वहीं 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के भगवती प्रसाद सागर ने 31,166 वोटों से शानदार जीत दर्ज की थी

2- बिठूर विधानसभा सीट-210
विधानसभा चुनाव 2012 में हुए परिसीमन के बाद बिठूर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई थी..करीब 124 किलोमीटर की परिधि वाली बिठूर विधानसभा की सीमा 5 विधानसभाओं का बॉर्डर टच करती है..बिठूर विधानसभा सीट में करीब 4 लाख मतदाता हैं.. जिसमें सबसे ज्यादा करीब 60 हजार ब्राह्मण वोटर हैं, ठाकुर 40 हजार, यादव 45 हजार, मुस्लिम, 15 हजार, कुशवाहा 25 हजार, पाल 15 हजार, साहू, सविता, विश्वकर्मा 5 हजार, प्रजापति 8 हजार, पासवान 35 हजार, कुरील 30 हजार, नुनिया चौहान 8 हजार, निषाद 15 हजार हैं.. विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी के मुनींद्र शुक्ला ने जीत दर्ज की थी.. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा ने कमल खिलाया था

3-कल्याणपुर विधानसभा सीट-211
1989 में जेडी के भूधर नारायण मिश्र को कड़ी टक्कर देते हुए बीजेपी की प्रेमलता कटियार ने साल 1991 पहली बार इस सीट पर बीजेपी का परचम लहराया था.. कल्याणपुर विधानसभा सीट पहले कांग्रेसियों का गढ़ थी.. इसके बाद इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा.. लगातार 4 बार बीजेपी की प्रेमलता कटियार चुनाव जीतीं.. कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक ओबीसी वोटर हैं लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सतीश निगम से 2,383 वोटों के अंतर से चार की विधायक रहीं प्रेमलता कटियार हार गईं थी.. जिसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रेमलता कटियार की बेटी ने नीलिमा कटियार 23,342 वोटों के अंतर से सतीश निगम को हराकर जीत दर्ज थी

4- गोविंद नगर विधानसभा सीट-212
गोविंद नगर विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल मानी जाती है बीते दो बार के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है.. साल 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सत्यदेव पचौरी ने बड़ी जीत हासिल की थी.. वहीं 2017 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सत्यदेव पचौरी को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया.. लोकसभा चुनाव 2019 में सत्यदेव पचौरी को प्रत्याशी बने और जीतकर सांसद बन गए.. सत्यदेव पचौरी ने कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल को हराया था.. सत्यदेव पचौरी के सांसद बनने के बाद गोविंद नगर सीट पर उपचुनाव हुए.. जिसमें बीजेपी के सुरेंद्र मैथानी ने जीत दर्ज की थी..1967 से लेकर 2012 तक के चुनाव में 1967, 1969, 1980, 1985, 2000 और 2007 में विधानसभा में कांग्रेस का कब्जा रहा, जबकि 1989, 1991, 1993, 1996 और 2012 के चुनाव में इस सीट से बीजेपी काबिज रही…1974 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और 1970 में जनता पार्टी ने यहां से चुनाव जीता था.. भारतीय जनता पार्टी के बाल चन्द्र मिश्र ने तो यहां से 1989 से 1996 तक लगातार चार चुनाव जीता

5- सीसामऊ विधानसभा सीट-213
कानपुर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल मानी जाती है.. साल 1996 में पहली बार बीजेपी के राकेश सोनकर कमल खिलाया था.. सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में 70 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी है.. इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा माना जाता है.. विवादों में रहने वाले समाजवादी पार्टी के नेता हाजी इरफान सोलंकी ने साल 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी.. इरफान सोलंकी 2007 के विधानसभा चुनाव में आर्यनगर विधानसभा सीट से भी चुनाव जीत चुके हैं.. इरफान सोलंकी लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं.. साल 2002 से 2007 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था.. कांग्रेस के संजीव दरियाबदी ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी

6- आर्यनगर विधानसभा सीट-214
2017 में आर्यनगर में कुल 48.14 प्रतिशत वोट पड़े… 2017 में समाजवादी पार्टी से अमिताभ बाजपेयी ने भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई को 5723 वोटों के मार्जिन से हराया था.. आर्यनगर विधानसभा सीट जनरल सीट है.. इस सीट को कारोबारियों की सीट भी कहा जाता है.. आर्यनगर क्षेत्र में यूपी की सबसे बड़ी कपड़़ा मार्केट है, बिरहाना रोड पर जूलरी की शॉप हैं, नौघड़ा की मार्केट है। इसे कानपुर की आर्थिक मंडी भी कहा जाता है.. इस विधानसभा सीट पर मुस्लिम आबादी भी रहती है

7- किदवई नगर विधानसभा सीट-215
किदवई नगर विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल सीट है.. ये सीट एशिया की सबसे बड़ी गोविंदनगर विधानसभा सीट से अलग कर बनाई गई थी.. विधानसभा चुनाव 2012 से पहले हुए परिसीमन के बाद किदवई नगर विधानसभा अस्तित्व में आई.. विधानसभा चुनाव 2012 में कांग्रेस के अजय कपूर ने जीत दर्ज की थी.. इससे पहले अजय कपूर गोविंद नगर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके थे.. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के महेश त्रिवेदी ने कांग्रेस के अजय कपूर को हराकर कमल खिलाया था.. 2017 में किदवई नगर में कुल 54.31 प्रतिशत वोट पड़े.. महेश त्रिवेदी ने 33,983 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी

8- कैंट विधानसभा सीट-216
साल 2017 में कानपुर कैंट में कुल 46.00 प्रतिशत वोट पड़े थे.. कानपुर की कैंट विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल क्षेत्र है.. जिले में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर कैंट क्षेत्र में रहते हैं.. मुस्लिम बाहुल सीट होने के बाद भी 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के रघुनंदन सिंह भदौरिया ने 9,308 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सुहैल अंसारी ने शानदार जीत दर्ज की थी.. साल 1991 से लेकर 2007 तक लगातार 4 बार बीजेपी के सतीश महाना ने इस सीट से चुनाव जीतकर कमल खिलाया था

9- महाराजपुर विधानसभा सीट-217
विधानसभा चुनाव 2012 में हुए परिसीमन के बाद महाराजपुर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई थी,, यह सीट पहले सरसौल विधानसभा सीट हुआ करती थी.. महाराज विधानसभा सीट पर ओबीसी और जनरल वोटरों की संख्या सबसे अधिक हैं। इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है.. महाराजपुर विधानसभा सीट से कैबिनेट मंत्री सतीश महाना विधायक हैं.. सतीश महाना ने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में कमल खिलाया था

10- घाटमपुर विधानसभा सीट-218
कानपुर की घाटमपुर विधानसभा सीट सुरक्षित सीट है.. इस सीट पर ओबीसी और अनुसूचित जनजाति के वोटरों की संख्या सर्वाधिक है.. 2012 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर सीट से एसपी के इंद्रजीत कोरी जीते थे.. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की कमलरानी वरूण ने 45,178 वोटों से शानदार जीत दर्ज की थीं.. कमल रानी वरूण को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.. लेकिन कोरोना की पहली लहर में उनका निधन हो गया था.. इसके बाद घाटमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे.. जिसमें उपेंद्र पासवान ने शानदार जीत दर्ज की थी

विनीत कुमार शर्मा