लखनऊ :: किसान राजनीति को केन्द्र में रख कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रही पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दस अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक जनसभा को संबोधित करेंगी। जगतपुर इंटर कालेज मैदान पर आयोजित होने वाली किसान न्याय रैली में शक्ति प्रदर्शन की गरज से भारी भीड़ जुटाने की तैयारी कांग्रेस कर रही है। हालांकि पार्टी का कहना है कि यह रैली विशुद्ध रूप से किसानो की समस्या पर केन्द्रित होगी जिसमें किसान ही हिस्सा लेंगे।

पार्टी के मीडिया संयोजक अशोक सिंह ने बताया कि रैली का समय सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया है जिसमें श्रीमती वाड्रा केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी, लखीमपुर कांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के अलावा तीन नये कृषि कानूनों की वापसी की मांग की जायेगी।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले यूपी कांग्रेस का नया चेहरा बन चुकी प्रियंका गांधी वाड्रा ने लखीमपुर हिंसा के बाद योगी सरकार के खिलाफ आक्रामक रवैया अख्तियार कर रखा है। लखीमपुर कांड की सूचना मिलते ही श्रीमती वाड्रा उसी रात दिल्ली से लखनऊ पहुंच कर लखीमपुर रवाना हाे गयी थी हालांकि सरकार को उनको रोकने के लिये काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी और आखिरकार उन्हे सीतापुर टोल प्लाजा में रोक लिया गया था। पीएसी गेस्ट हाउस में ठहरी प्रियंका ने झाडू लगाती फोटो वायरल कर सुर्खियां बटोरी। आखिरकार बुधवार को उन्हे रिहा करने के निर्देश दिये गये जिसके बाद कांग्रेस महासचिव पहले लखीमपुर और फिर बहराइच जाकर मृतक किसानो के परिजनों से मिली।

राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण इस राज्य में प्रियंका के तेवर को बरकरार रखने के लिये समूची कांग्रेस उनके पीछे खड़ी नजर आयी। छत्तीसगढ और पंजाब के मुख्यमंत्री ने यूपी में अपनी आमद दर्ज करायी जबकि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी सहारनपुर जिला प्रशासन को छकाते हुये आज लखीमपुर जा पहुंचे। किसानो की हमदर्दी हासिल करने के लिये पंजाब और छत्तीसगढ की सरकारों ने चार मृतक किसान और एक पत्रकार के आश्रितों को 50-50 लाख रूपये की मदद का एलान किया।

गोरखपुर के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के झाड़ू काे लेकर दिये गये एक बयान पर भी पलटवार करते हुये श्रीमती वाड्रा अपने एक दिवंगत दलित कार्यकर्ता के घर पहुंची और वहां महर्षि वाल्मीकि आश्रम में झाड़ू लगा कर कहा कि मुख्यमंत्री योगी दलित विरोधी है। अब जबकि वाराणसी में रैली की अनुमति मिल चुकी है, सरकार की पैनी निगाह प्रियंका की रैली और उनके भाषण पर होगी।


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