कानपुर : केंद्र सरकार एक तरफ स्वच्छ भारत के सपने देख रही है तो वही कानपुर जैसे महानगर में गंदगी के अंबार से मोहल्ले में लोग परेशान हैं। कानपुर महानगर में आपने बहुत जगह लिखा देखा होगा ग्रीन सिटी कानपुर और क्लीन सिटी कानपुर लेकिन यह सिर्फ दिखावा है। कानपुर की जो वास्तविक हकीकत है उसे देखकर आप सभी हैरान हो जाएंगे।

दिखावे के लिए काम आखिर विकास होगा कब

इस समय सभी लोग 2 दिन की सफाई और फोटो खिंचवाने के लिए सफाई अभियान चलाते हैं देखने से तो यही लगता है। क्योंकि कानपुर में कुछ मोहल्ले ऐसे हैं जो बीमारियों को दावत दे रहे हैं। कानपुर महानगर के बर्रा थाना क्षेत्र व नौबस्ता थाना क्षेत्र के बीच में बनी मोहल्ले में गंदगी और सड़कों पर भरे पानी से राहगीर समेत आसपास रहने वाले लोग भी परेशान हैं। मामला योगेंद्र विहार में स्थित निहारिका हॉस्पिटल के पास का है जहां लोग अपने घरों के आसपास और सड़क पर भरे पानी से परेशान हैं। क्योंकि इस समय प्रदेश में डेंगू एवं वायरल बुखार ने लोगों को परेशान कर दिया है। आस पड़ोस में रहने वाले लोग परेशान हैं कच्ची सड़कों पर भरे पानी से तो कहीं घर के बगल में और घर के सामने सड़क की जगह नाला नजर आने से जिसमें बीमारी का खतरा हमेशा बना रहता है।

आखिर कहां गया विकास पार्षद जी भी हुए गायब

अभी चुनाव होते हैं तो सभी नेता विकास की बात कहकर वोट मांगने आते हैं और जैसे ही चुनाव परिणाम आने के बाद नेता जी को जीत मिलती है तो वह जनता को नजरअंदाज कर देते हैं। और तो और जनता से वोट मांगने के वक्त किए वादे भी शायद उनको याद नहीं रहते। इस समय विकास की राह देख रही योगेंद्र विहार के निहारिका हॉस्पिटल के पास की जनता सड़क पर भरे पानी और गंदगी से परेशान है और बराबर डर बना रहता है बीमारी फैलने का लेकिन वोट मांगने के बाद जनप्रतिनिधि लगता है कि इस क्षेत्र की जनता को भूल ही गए हैं जो आज भी विकास की राह देख रही है।

सांसद और पार्षद से उम्मीद लगाए बैठे लोग हुए हताश

पब्लिक इस खतरनाक बीमारीओ से लगातार लड़ रही है। इससे कई लोगों को हानि भी पहुंची है‌। और यहां के पार्षद जो कि वार्ड 21 के अंतर्गत किसी भी प्रकार की कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं और यहां के सांसदों के पास भी कई लोग जा चुके हैं। परंतु वहां से भी दिलासा अलावा अभी तक कुछ भी नहीं किया। सिर्फ भरोसा और दिलासा के अलावा उम्मीद की आस लगाए बैठी जनता को जन सेवकों से कुछ नहीं मिला। अब देखना यह होगा कि आखिर कानपुर की इस गलियों तक विकास कब तक पहुंचता है।

रिपोर्ट :: निखिल अग्रवाल