रहस्य : क्या आप जानते हैं भगवान शिव के कितनी पुत्रियां थी

by News Desk
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अधिकतर लोगों को अभी सिर्फ भगवान शंकर के दो ही संतानों के बारे में जानकारी होगी। क्या आपको पता है। कि वास्तव में भगवान शिव के कितनी संताने थी। आइए हम आपको भगवान शंकर के संतानों के बारे में पूरी जानकारी देते हैं…..

भगवान शंकर कितनी संताने थी

अधिकतर लोगों को यह ज्ञात होगा कि भगवान शंकर के सिर्फ दो ही संताने थी। कार्तिकेय और गणेश जी। क्या आपको पता है कि वास्तव में भगवान शिव के कितनी संताने थी। हम आपको बताते हैं कि आखिर भगवान शंकर के कितनी संताने थी। भगवान शिव के 6 संताने थी। इसका जिक्र शिव पुराण में किया गया है। जिसमें 3 पुत्र और 3 पुत्रियां बताया गया है। भगवान शिव के तीसरे पुत्र का नाम अय्यप्पा है। और दक्षिण भारत में इनको बड़ी श्रद्धा भाव से पूजा जाता है। एवं भगवान शंकर के 3 पुत्रियां थी। जिनका नाम अशोक सुंदरी, ज्‍योति या मां ज्‍वालामुखी और देवी वासुकी या मनसा।
हालांकि बहने अपने भाइयों की तरह चर्चित नहीं है। लेकिन देश के कई हिस्सों में इनकी बड़ी धूमधाम से पूजा की जाती है।

अब आपको बताते हैं भगवान शिव के तीनों पुत्रियों के बारे में

:अशोक सुंदरी:

दरअसल माता पार्वती के अकेलेपन को दूर करने हेतु कल्पवृक्ष नामक पेड़ के द्वारा ही अशोक सुंदरी की रचना हुई थी। पद्म पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती विश्व में सबसे सुंदर उद्यान में जाने के लिए भगवान शिव से कहा। तब भगवान शिव पार्वती को नंदनवन ले गए, वहां माता को कल्पवृक्ष से लगाव हो गया और उन्‍होंने उस वृक्ष को लेकर कैलाश आ गईं।

कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष है, पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने हेतु उस वृक्ष से यह वर मांगा कि उन्‍हें एक कन्या प्राप्त हो, तब कल्पवृक्ष द्वारा अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। आपको बता दें कि अशोक सुंदरी की पूजा खासतौर पर गुजरात में होती है। 

:ज्योति:

भगवान शिव की दूसरी पुत्री का नाम ज्योति था। ज्योति का मतलब ज्वाला शिव जी की दूसरी पुत्री के जन्म को लेकर दो कथाएं प्रचलन में आती हैं। पहली कथा के अनुसार माता ज्योति का जन्म भगवान शिव के तेज से हुआ था और वह उनके प्रभामंडल का स्‍वरूप हैं। दूसरी कहानी में,  वह देवी पार्वती के माथे की चिंगारी से पैदा हुई थी। वह सामान्यतः अपने भाई कार्तिकेय से जुड़ी हुई थीं। तमिलनाडु के कई मंदिरों में उनकी पूजा की जाती है। भारत के कुछ हिस्सों में, उन्‍हें देवी रेकी के रूप में भी पूजा जाता है जो वैदिक राक के साथ जुड़ा हुआ है। उत्तर भारत में, वह देवी ज्वालामुखी के रूप में जानी जाती हैं।

:मानसा:

भगवान शिव की तीसरी बेटी का नाम मानसा है। कहां जाता है की भगवान शिव की तीसरी बेटी को गुस्सा बहुत तेज आता है। गुस्से में सबसे तेज देवियों में इनका नाम शुमार है। बंगाल की लोक कथाओं के अनुसार सर्पदंश का इलाज मनसा देवी के पास होता है। उनका जन्‍म तब हुआ था, जब शिव जी का वीर्य कद्रु, जिन्हें सांपों की मां कहा जाता है, की प्रतिमा को छू गया था। इसलिए उनको शिव की पुत्री कहा जाता है लेकिन पार्वती की नहीं। यानी मनसा का जन्‍म भी कार्तिकेय की तरह पार्वती के गर्भ से नहीं हुआ था। इन्हें कई जगह नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी पूजा जाता है, इनका प्रसिद्ध मंदिर हरिद्वार में स्थापित है।

आपको बता दें कि भगवान शिव की पुत्रियों के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं लेकिन पौराणिक कथाओं और पुराणों में इनका जिक्र किया गया है।

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