हिमाचल औऱ उत्तराखंड के बीच लगती सीमा के दूरदराज क्षेत्र में बसे, हाटी समुदाय के छोटे के गावं बाड़ी तहसील शिलाई जिला सिरमौर हिमाचल प्रदेश के गरीब परिवार में जन्में प्रकाश पराशर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।
(हिमाचल प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा) वित्त विभाग में वित्त अधिकारी के पद पर कार्यरत, प्रताप पराशर साहित्य के क्षेत्र में “वह ढूँढती रोटी” आपकी प्रथम पुस्तक है, जिसे इंक पब्लिकेशन, प्रयागराज ने प्रकाशित किया है।
गौरतलब है कि- काव्य संग्रह “वह ढूँढती रोटी” प्रकाशित होने के मात्र चार दिनों के भीतर ही हिंदी साहित्य के गलियारे में उत्सुकता और चर्चा का विषय बना हुआ है।

आमतौर पर ऐसा होता नहीं है ..
कहानी, उपन्यास, मिथक या किसी और विषय पर अमेजॉन की बेस्टसेलर सूची में स्थान बनाना कोई बड़ी बात नहीं है, यह अक्सर होता रहता है .. लेकिन एक बिल्कुल नए कवि के काव्य संग्रह का अमेजॉन बेस्ट सेलर्स Top100 की सूची में स्थान बनाना, एक सुखद आश्चर्य जैसा प्रतीत हो रहा है….
इस बात पर मुझे प्रयागराज एवं देश के बड़े हस्ताक्षरों में से एक रहे, नंदन हितैषी जी के वह शब्द याद आ रहे हैं –
“नहीं होती कविता कभी हाशिए पर”
यह कहना था नंदन हितैषी जी का…और बिल्कुल वैसा ही संयोग इस पुस्तक के साथ भी।

महत्वपूर्ण बात-
यदि आप कविता पढ़ते हैं तो यह पुस्तक आपके पर्सनल कलेक्शन में होना ही चाहिए, मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि यह पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी।
इस पुस्तक की कविताओं में जो भाव है, जो शिल्प है, जो समाज और मनुष्यता का मार्मिक चित्रण है… निःसन्देह वह अद्भुत है।
अंत में –
कवि प्रताप पराशर को इस अद्भुत सृजन एवं “वह ढूँढती रोटी” काव्य संग्रह के पाठकों को मेरी ओर से अनन्त शुभकामनाएं, मंगलकामनाये।
शुभ-शुभ 🙏🌹💐

दिनेश कुशवाहा
(प्रबन्ध निदेशक – इंक पब्लिकेशन)