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आचार संहिता लागू फिर भी व्यस्त सड़क मार्गो पर लगे हैं होर्डिंग पोस्टर बैनर
 

कायमगंज / फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तिथियां निर्धारित करते हुए आदर्श आचार संहिता लागू होने की भी घोषणा कर दी ।

आदर्श आचार संहिता का पालन करना हर एक राजनैतिक पार्टी के लिए आवश्यक होता है। उल्लंघन करने पर उसके विरुद्ध कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाती है। समय-समय पर इसके उदाहरण भी सामने आते रहे हैं। लेकिन यह कार्यवाही चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप जिम्मेदार प्रशासन को ही करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं।

हालांकि अभी राजनैतिक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों के नाम क्षेत्र वाइज पूरी तरह घोषित नहीं किए हैं।  किंतु चुनावी आहट तो बहुत पहले से ही सुनाई देने लगी थी। इसी के चलते विभिन्न पार्टियों के संभावित उम्मीदवारों ने एवं पार्टी के छोटे बड़े पदाधिकारियों ने अपने- अपने प्रचार- प्रसार के लिए खासकर व्यस्त सड़क मार्ग कायमगंज- फर्रुखाबाद, कायमगंज- अलीगंज ,कायमगंज -कंपिल , सिवारा मार्ग, रुदायन मार्ग ,कुआं खेड़ा मार्ग ,केनाल बरखेड़ा मार्ग , कायमगंज- अचरा मार्ग सहित लगभग सभी सड़क मार्गो के किनारे लगे विद्युत पोलों या फिर अन्य साधनों तथा पेड़ों का सहारा लेकर बड़े-बड़े होर्डिग्स पोस्टर बैनर लगा रखे हैं।

आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। और निर्वाचन आयोग द्वारा इस स्पष्ट दिशानिर्देश भी जारी किए जा चुके हैं । तो भी यह सभी प्रचार-प्रसार की वस्तुएं अपनी- अपनी जगह ज्यों की त्यों, लगाने वाली पार्टी, उसके पदाधिकारियों की शान में उसकी शोभा बयां करते हुए लगे हैं । जनपद में कुछ जगह तो यह सारी चीजें हटना शुरू हो चुकी हैं। लेकिन न जाने क्यों कायमगंज प्रशासन इन प्रचार प्रसार की राजनैतिक वस्तुओं की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

वैसे तो हर एक पार्टी के पदाधिकारियों की प्रचार सामग्री टंगी हुई है।  किंतु इनमें सबसे अधिक पोस्टर बैनर आदि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के ही नजर आ रहे हैं।  हो सकता है ,सत्ता खौफ आज भी नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी महसूस कर रहे हो। और इसी वजह से इस सामग्री को आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के बावजूद भी हटाने में जानबूझकर देरी कर रहे हों। इसको तो अच्छी तरह से यही समझ सकते हैं । किंतु जनसामान्य में एक भ्रम की स्थिति तो उत्पन्न हो ही रही है।

सामग्री हटाने की बात की जाए तो यह तो  हटेगी ही। भले ही कुछ देर से सही। लेकिन इतना तय है कि दूसरे दलों को प्रशासन पर टिप्पणी करने का मौका तो मिल ही जाएगा।


रिपोर्ट- जयपाल सिंह यादव, दानिश खान

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