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Kanpur Metro : सुविधा के साथ सुरक्षा में भी है खास, देश की सबसे उन्नत तकनीकि से लैस है सभी स्टेशन

अलग-अलग सामानों के लिए एक निर्धारित कलर-कोडिंग है, जिससे उनकी पहचान की जाती है। सामान के घनत्व के हिसाब से मशीन कलर दिखाती है। आमतौर पर ऑरेंज, ब्राउन, ग्रीन और यलो कलर्स ख़तरे का संकेत नहीं होते, लेकिन सुरक्षाकर्मी को सामान की आकृति (शेप) पर गौर करना होता है और अगर आकृति संदिग्ध लगती है तो सामान को खोलकर चेक किया जाता है। ब्लू, ब्लैक और सिल्वर या ग्रे कलर, संदिग्ध वस्तु के संकेतक होते हैं। इन रंगों का संकेत मिलने पर तत्काल सामान की जाँच की जाती है।

 


कानपुर मेट्रो के स्टेशनों और डिपो में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. की अत्याधुनिक बैगेज स्कैनर मशीनें लगी हैं, जिन्हें एक्स-रे बैगेज इन्सपेक्शन सिस्टम (XBIS) कहा जाता है। ये मशीनें, मेट्रो सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था को अचूक या फ़ूल-प्रूफ़ बनाती हैं और प्रतिबंधित सामग्रियों की पहचान करने और उन्हें प्रवेश द्वारा पर ही रोकने में सुरक्षाकर्मियों की मदद करती हैं। कानपुर मेट्रो की सुरक्षा में उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्यॉरिटी फ़ोर्स (यूपीएसएसएफ़) के सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इनके अलावा निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड भी स्टेशनों पर मौजूद रहते हैं। बैगेज स्कैनिंग की मॉनिटरिंग का ज़िम्मा यूपीएसएसएफ़ के हाथों में है, जिनके सुरक्षाकर्मियों की ट्रेनिंग नोएडा में स्थित ट्रेनिंग सेंटर में हुई है।

X-BIS मशीन की विशेषताएँ:

—देश में उपलब्ध तकनीक के हिसाब से कानपुर मेट्रो में सबसे लेटेस्ट बैगेज स्कैनर मशीनें लगाई गई हैं।

—मशीन पर तैनात सुरक्षाकर्मी के सामने दो मॉनिटर होते हैं। एक स्क्रीन पर कलर्ड (रंगीन) इमेज आती है और एक स्क्रीन पर ब्लैक ऐंड व्हाइट। ब्लैक ऐंड व्हाइट इमेज से साफ़तौर पर आकृति का पता चलता है और रंगीन इमेज कलर कोडिंग के हिसाब से संकेत देती है।

—अलग-अलग सामानों के लिए एक निर्धारित कलर-कोडिंग है, जिससे उनकी पहचान की जाती है। सामान के घनत्व के हिसाब से मशीन कलर दिखाती है। आमतौर पर ऑरेंज, ब्राउन, ग्रीन और यलो कलर्स ख़तरे का संकेत नहीं होते, लेकिन सुरक्षाकर्मी को सामान की आकृति (शेप) पर गौर करना होता है और अगर आकृति संदिग्ध लगती है तो सामान को खोलकर चेक किया जाता है। ब्लू, ब्लैक और सिल्वर या ग्रे कलर, संदिग्ध वस्तु के संकेतक होते हैं। इन रंगों का संकेत मिलने पर तत्काल सामान की जाँच की जाती है।

—35 एमएम मोटे स्टील के अंदर रखे सामान की भी पहचान की जा सकती है। इससे अधिक मोटाई होने पर मशीन सामान को ब्लैक या ग्रे कलर में दिखाती है और सुरक्षाकर्मी को सामान की जाँच करनी होती है।

—मशीन की स्टोरेज क्षमता 2 लाख इमेज की है। 

—एक मशीन में 1280 सेंसर्स लगे हुए हैं।

—बैगेज स्कैन करने के लिए लगी हुई कन्वेयर बेल्ट की क्षमता 165 किलो है और यह बेल्ट आगे-पीछे, दोनों ही दिशाओं में चल सकती है।

—यात्रियों का सामान मशीन में न फँसे इसके लिए, दो इमरजेंसी स्टॉप स्विच मशीन में हैं और एक कीबोर्ड में।


सुरक्षाकर्मियों की तत्परता की जाँच के लिए भी है मशीन में ख़ास फ़ीचर:
सुरक्षाकर्मियों की तत्परता जाँचने के लिए मशीन में थ्रेट इमेज प्रोटेक्शन (टीआईपी) नाम का एक फ़ीचर है। यह फ़ीचर, मॉनिटर पर फ़ाल्स थ्रेट इमेज दिखाता है, जिसपर सुरक्षाकर्मी को तत्काल क्लिक करना होता है। क्लिक करने के बाद मशीन यह स्पष्ट कर देती है कि इमेज फ़ाल्स या झूठी थी और वास्तविकता में कोई ख़तरा नहीं है। सुरक्षाकर्मी ने कितनी बार फ़ाल्स इमेज पर क्लिक किया, इसकी रिपोर्ट भी मशीन तैयार करती है। 

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