किसी भी साधारण इंसान को सबसे बड़ा खौफ किस बात का होता है? किसी का जवाब हो सकता है नौकरी खोने का डर तो कोई कहेगा गंभीर बीमारी की आशंका। लेकिन सम्भवत: हम में से कई लोगों का जवाब होगा जेल की सलाखें। जेल एक ऐसी जगह है जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होता है लेकिन इसका डर यकीनन सभी को होता है और जाने-अनजाने जेल में बंद हो जाने का खौफ किसी को भी झिंझोड़ सकता है। डर, रहस्यी और जासूसी कहानियों को लिखने-सुनाने के फन में माहिर कहानीकार सुधांशु राय की ताज़ातरीन कहानी हमें जेलों की इसी खौफनाक दुनिया के सफर पर ले जाती है और साथ ही हमें अपने अंदर बैठे शैतान से भी मिलवाती है। कहानी का शीर्षक ‘द प्रिज़्रनर’ इस लिहाज़ से बिल्कुतल सटीक है।

सुधांशु राय की इस कहानी का मुख्यप पात्र बिज़नेस टाइकून विक्रमजीत राय सिंह है जिसकी शुरुआत बेहद साधारण पृष्ठमभूमि से हुई लेकिन धीरे-धीरे जब कामयाबी उसके कदम चूमने लगी तो वक़् त के साथ वह घमंडी और क्रूर बन गया। कहानी की शुरुआत होती है विक्रमजीत को एक सत्र न्या‍याधीश द्वारा जेल की सजा सुनाए जाने के साथ। उस पर आरोप है कि उसने 800 करोड़ रु की भारी रकम का गबन किया है। उसे उत्तसर प्रदेश में प्रयागराज (इलाहाबाद) के नज़दीक एक पुरानी जेल में सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है।

लेकिन उसे यकीन है कि उसे जल्द ही जमानत मिल जाएगी और वह जेल से छूट जाएगा। इसी घमंड के चलते वह जेल में भी पुलिसकर्मियों और जेल अधिकारियों पर रौब जमाता रहता है। लेकिन फिर उसका सामना एक ऐसे कैदी से होता है जिस पर इल्ज़ा म है मानवभक्षी होने का और इस रहस्यतमयी कैदी से मिलने के बाद से ही हमारी कहानी का किरदार एक डरपोक कैदी में बदल जाता है। कहानीकार सुधांशु राय जब जेल और उसमें बंद कैदियों का खाका अपने खास अंदाज़ में खींचते हैं तो जेल की ऊंची दीवारों और सलाखों के उस पार का खौफ श्रोताओं के रौंगटे खड़े कर देता है।

आखिर जेल में बंद यह रहस्यहमी कैदी कौन है? क्योंश उस कैदी को जेल में देखकर विक्रमजीत की घिग्धीम बंध गई थी? आखिर उसने ऐसे कौन-से सवाल विक्रमजीत से किए जिन्हें सुनने के बाद उसका सामाना अपने ही भीतर छिपे शैतान से हुआ ? और कागज़ के उस पुर्जे पर क्याे लिखा था जो कैदी ने कहानी के प्रमुख नायक को थमाया था? इन तमाम सवालों के जवाब ‘द प्रिज़् नर’ कहानी को सुनकर मिल सकते हैं।