गुजरात : गुजरात के गांधीनगर में एक दिल दहला देने वाला वारदात सामने आया। एक पिता ने अपने 10 महीने के मासूम बच्चे को गांधीनगर के पेठापुर स्थित स्वामीनारायण गौशाला के बाहर रोता बिलखता छोड़ कर चला गया। बच्चे का पिता बच्चे की मां का कत्ल करके उसे सूटकेस में भर के किचन में ही छोड़ दिया था।

जानिए क्या है पूरा मामला

रात का वक़्त था समय 9:20 हो रहे थे. गांधीनगर के पेठापुर में स्थित स्वामीनारायण गौशाला के बाहर एक बच्चे की रोने की आवाज सुनाई देने लगी। आवाज को सुनते ही गौशाला में काम करने वाले कुछ कर्मचारी बाहर आए तो देखें कि एक छोटा मासूम बच्चा रो रहा है । उन्होंने बच्चे को उठाकर गौशाला के अंदर ले गए । और गौशाला के बाहर तथा अंदर छानबीन किए कि कहीं उसके मां-बाप का पता चल जाए ।

परंतु वहां कोई दिखाई नहीं दिया, गौशाला के कर्मचारी इस घटना की सूचना पुलिस को दीये। मौके पर पहुंची पुलिस बच्चे को अपने पास ले ली और उसके मां-बाप को ढूंढने लगे, परंतु कोई नहीं मिला। जब खबर इलाके के पार्षद दीप्ति पटेल के पास गई तो पार्षद मोहोदया मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्चे को दीप्ति पटेल को दे दिया, पटेल मैडम बच्चे का ख्याल पूरी रात रखी।

सुबह होते होते सोशल मीडिया पर रोते हुए बच्चे की वीडियो वायरल होने लगी तथा बच्चे के मां-बाप को खोजने की मुहिम तेज हो गई. काफी लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चे को गोद लेने की भी बात कही| यह खबर गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी तक पहुंच गई|

हर्ष संघवी बच्चे से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचे जहां बच्चे को मेडिकल के लिए एडमिट किया गया था। गृह मंत्री ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिया कि टीम बनाकर के बच्चे के मां-बाप को ढूंढा जाए। मंत्री जी के आदेशानुसार पुलिस बच्चे के मां-बाप को ढूंढने में लग गई।

CCTV के माध्यम से मिला सुराग-

गुजरात की गांधीनगर पुलिस ने 85 पुलिस वालों की 14 अलग अलग टीम बनाकर के बच्चे के मां-बाप को ढूंढने में लगी थी. जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने गौशाला के आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू की.

इस मुहिम में बड़ी कामयाबी मिलते हुए पुलिस को एक सेंट्रो कार की शक्ल में एक सुराग मिला. जिसमें एक शख्स एक बच्चे के साथ सेंट्रो कार में इस गौशाला की तरफ आता हुआ दिखाई दे रहा था.

सीसीटीवी की तस्वीरों से उस कार का नंबर प्लेट निकाला गया. तथा कार की नंबर प्लेट से रजिस्ट्रेशन नंबर निकाला गया. और उसके मालिक का पता लगाया गया. पता चला कि कार सचिन दीक्षित नाम के एक व्यक्ति की है. जिसकी उम्र लगभग 30 साल है।

बच्चे को छोड़ने वाला व्यक्ति था बच्चे का पिता-

पुलिस ने सचिन दीक्षित को ढूंढना शुरू कर दिया. सचिन दीक्षित के गांधीनगर के एक पते पर पहुंचकर पुलिस ने देखा कि उसके घर पर ताला लगा था। तब पुलिस ने सचिन दीक्षित का मोबाइल नंबर निकाला मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया गया तो पता चला कि वह राजस्थान के कोटा में है. पुलिस ने सचिन दीक्षित को फोन किया और उसके बच्चे के बारे में बताया. सचिन ने मान लिया कि वह बच्चा उसी का है. फिर उसने बताया कि उसका नाम शिवांश है.

गुजरात पुलिस राजस्थान पुलिस की मदद से कोटा से सचिन को पकड़ने में कामयाब हो गई. जब सचिन को गिरफ्तार किया गया तब वह अपनी पत्नी तथा 4 साल के बेटे और मां बाप के साथ था. और उसी सेंट्रो कार से दशहरा मनाने के लिए उत्तर प्रदेश जा रहा था.

सचिन उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। जब गुजरात पुलिस ने शिवांश के बारे में पूछताछ शुरू किया तो सचिन चुप हो गया. और सचिन की पत्नी अनुराधा से पूछताछ करने पर पता चला कि अनुराधा का एक बेटा है जो 4 साल का है। अनुराधा 10 महीने के छोटे से शिवांश को देख कर हैरान हो गई. उसने उस बच्चे को पहचानने से इंकार कर दिया और कहा कि यह हमारा बच्चा है ही नहीं।

पुलिस ने सचिन से आखिरकार सच उगलवा लिया। सचिन से पूछताछ पर पूरे मामले का पता चला। उत्तर प्रदेश का रहने वाला सचिन दीक्षित गांधीनगर की एक कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर था. उसकी शादी घर वालों ने अनुराधा के साथ कराई थी.

दोनों का 3 साल का बेटा भी है 2018 में सचिन की मुलाकात मेहंदी उर्फ़ हिना नाम की एक लड़की से हुई. मेहंदी और सचिन के बीच नज़दीकियां बढ़ने लगी और प्यार हो गया.

कुछ दिन बाद सचिन का ट्रांसफर बड़ोदरा हो गया. बड़ोदरा में ही दर्शन सोसाइटी में एक फ्लैट किराए पर लेकर रहने लगा. तथा वहीं पर मेहंदी को भी बुला लिया. और दोनों लिव-इन में रहने लगे।

मेहंदी को इसके शादीशुदा होने की जानकारी पहले से ही थी. मेहंदी के पिता तथा माता का तलाक हो चुका है. तथा दोनों अलग-अलग रहते हैं। शातिर सचिव हफ्ते के 4 दिन वडोदरा में मेहंदी के साथ रहता था तथा वीकेंड के 2 दिन अपने परिवार के साथ की बिताता था।

दिसंबर 2020 में मेहंदी तथा सचिव को एक बच्चा हुआ जिसका सर नाम शिवांश रखा. मेहंदी अब सचिन पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी परंतु सचिव टालमटोल करता रहा. 8 अक्टूबर यानी शनिवार को सचिन ने मेहंदी से कहा कि वह छुट्टियां बिताने के लिए दशहरा में अपने घर उत्तर प्रदेश जाने वाला है।

मेहंदी ने सचिन को जाने से रोका. इसी बात को लेकर सचिन तथा मेहंदी का झगड़ा हो गया. जिसे सचिन का गुस्सा बढ़ता गया और उसने गला घोटकर मेहंदी को मार डाला।
मेहंदी को मारने के बाद उसने एक सूटकेस में उसे डाल दिया और बच्चे को लेकर चल दिया.

रास्ते में पड़ने वाले गौशाला के पास उसने बच्चे को छोड़ दिया. क्योंकि वह जानता था कि गौशाला के पास होने से उसे कोई ना कोई जरुर पल लेगा| पुलिस की एक टीम बड़ोदरा वाले सचिन के घर पर पहुंची तो उसे एक सूटकेस में मेहंदी की लाश मिली। पुलिस ने सचिन दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया है|