लेखिका अंचल सक्सेना फ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य से स्नाकोत्तर उपाधि पाने के बाद वकालत पढ़ी और लगभग 5 वर्ष जिला कचहरी, फतेहगढ़ में फौजदारी की प्रैक्टिस की। बचपन से कहानी और कविता से उन्हें लगाव रहा पर लेखन में कदम संयोग से 2016 में रखा। ब्लॉग लेखन और अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद से शुरू हुआ सिलसिला उपन्यास लिखने तक पहुँच गया और 2019 में अंचल सक्सेना का पहला उपन्यास “विश्वास और मैं” छपा। 2019 में ही कथेतर विधा के अन्तर्गत उनकी दूसरी किताब “मेरी कचहरी” प्रकाशित हुई जो एक वकील के रूप में उनके सत्य अनुभवों पर आधारित किताब थी। वर्ष 2020 में एक बार फिर कथा साहित्य के रूप में उनकी तीसरी किताब “चुटकी भर कहानी” इंक पब्लिकेशन के माध्यम से प्रकाशित हुई। उनकी चौथी किताब “इश्क़ फ़र्रुख़ाबादी” इसी वर्ष सितंबर में प्रकाशित हुई है। ब्लॉग्स्पॉट. कॉम पर प्रकाशित अंचल के लेख बहुत पसंद किए जाते हैं।

इश्क़ फ़र्रुख़ाबादी अंचल सक्सेना का दूसरा उपन्यास है। प्रेम से भरा ये उपन्यास उनके शहर फ़र्रुख़ाबाद की एक छोटी सी झलक भी दिखाता है। इस उपन्यास में कई प्रेम कहानियाँ हैं जो मुख्य कहानी और उसके पात्रों से जुड़ाव रखती हैं। अपने शहर से लगाव के चलते उन्होंने इस उपन्यास की हर प्रेम कहानी को शहर और उसकी छोटी-छोटी चीजों से जोड़कर बुना है। फ़र्रुख़ाबाद के पांचाल घाट (घटिया घाट) पर माँ गंगा की गोद से शुरू हुई कहानी अपने साथ मेला रामनगरिया और भुने आलुओं का स्वाद भी चखाती है। साथ ही फ़र्रुख़ाबाद के महाभारत कालीन इतिहास का रंग भी दिखाती है। ठप्पा छपाई और रंगरेजों के मोहल्ले से गुज़रते हुए लेखिका प्रेम रचती गई हैं। फ़र्रुख़ाबाद की मशहूर ज़रदोज़ी की कारीगरी और उसका बॉलीवुड कनेक्शन की आपको इस किताब से जानने को मिलेगा।

अंचल कहती हैं कि वो प्रेम पर जितना चाहे लिख सकती हैं। उनकी लिखी हर प्रेम कहानी में नया स्वाद होता है। “इश्क़ फ़र्रुख़ाबादी” में प्रेम है और फ़र्रुख़ाबाद भी। इस किताब को पढ़कर आप कुछ फ़र्रुख़ाबाद को जानिए और कुछ लेखिका के प्रेमपूर्ण हृदय को।