हर किसी का नया साल मनाने का अलग तरीका होता है फिर अगर ऐसे मौके पर कुछ समाज सेवा की जाये तो शायद मनुष्य जीवन की सार्थकता पूर्ण हो जाती है |
दिल्ली शकरपुर निवासी अंकित नागर पुत्र सुभाष नागर ने कल नववर्ष पर न जाने कितने ही गरीबो में कपड़ो और ज़रूरत की चीज़ो का वितरण किया | ये अपनी पारिवारिक परम्परा को आगे बढ़ा रहे है |

पहले इनके स्वर्गवासी पिता सुभाष नागर भी समाज सेवा में निहित थे और इनके बड़े भाई अनिल नागर (बब्बल )ने लॉक डाउन में ऑक्सीजन सिलेंडर बांटे थे | इनका मानना है की अपने लिए जिए तो क्या जिए जीवन में छोटे -बड़े अवसरों पर जितना हो सके उतना समाज सेवा करनी चाहिए | अंततः इंसानियत ही अंतिम लक्ष्य है |