कानपुर : उद्योग नगरी कानपुर में वैसे तो मां गंगा की सुबह-शाम आरती होती रही है, लेकिन एक उत्सव की तरह आज सैकड़ों सालों बाद दियो की जगमगाहट के साथ गंगा आरती की गई। आपको बता दे कि अब कानपुर में भी हरिद्वार और काशी में होने वाली गंगा आरती देखने को मिलेंगी। काशी और हरिद्वार में लोग गंगा आरती को देखने के लिए दूर दूर से आते है। अब कानपुर के अटल घाट पर भी इसी तर्ज पर आरती की जाएगी।

मंडलायुक्त ने जानकारी देते हुए कहा कि इस पहले ट्रायल आरती की सफलता को देखते हुए नगर निगम एक “गंगा आरती आयोजन समिति” की स्थापना करेगा। समिति वाराणसी और हरिद्वार भ्रमण कर आरती का अध्ययन करेगी और फिर अगले 6 महीनों के लिए एक महीने में एक दिन आरती की योजना बनाएगी और फिर अगले छह महीनों के लिए हर सप्ताह एक आरती करेगी। एक वर्ष के बाद, एक बार जब चीजें स्थिर हो जाती हैं, तो अटल घाट पर हर दिन आरती की जाएगी। यह स्वच्छ और अविरल गंगा के बारे में जागरूकता के साथ-साथ कानपुर के पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा।

जिला प्रशासन की ओर से इस मौके पर 21 हजार दीप जलाए गए। इस भव्य नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी अटल घाट पहुंचे।

पंडित शिवाकांत मिश्रा ने पूरे विधि विधान से गंगा आरती की। इस मौके पर यूपी के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, मेयर प्रमिला पांडेय और जिला प्रशासन के आलाधिकारी मौजूद रहे। कानपुर में पहले विशेष पर्व पर ही गंगा आरती होती थी। देव दीपावली के मौके पर परमट घाट और सरसैया घाट पर गंगा आरती का आयोजन किया जाता था।

आपको बता दे कि प्रधान मंत्री मोदी दिसंबर 2019 में जब राष्ट्रीय गंगा परिषद (नमामि गंगे प्रोजेक्ट) की पहली बैठक में शामिल होने उत्तर प्रदेश के कानपुर पहुंचे थे। तो इस दौरान परियोजनाओं का निरीक्षण करते हुए जब वह इसी घट पर लड़खड़ाकर गए थे। पीएम मोदी ने 11 माह पहले कानपुर के इसी घाट पर आरती की थी।