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आज विशेष में पढ़िए वरिष्ठ साहित्यकार व राजनेत्री डॉ. गीता सिंह चौहान द्वारा कोरोना छंद | डॉ गीता कविता व कहानी संग्रह की रचनायें भी प्रकाशित हो चुकी हैं | इसके अलावा वे ‘ज्योति मधुरिमा’ नामक पत्रिका की संपादक भी हैं-

बेसुधे से हो गये थे खुद के लिए भी हम।
इसीलिए दे रहा यह दस्तक ʼकरोनाʼ है।।
तन मन लगन से आत्मबल को बढ़ायें।
सोचना यही है यह तक्षक ʼकरोनाʼ है।।
योगा-अभ्यास करें दूर दूर होके रहें।
तभी झुकायेगा हमें मस्तक ʼकरोनाʼ है।।
रहें साफ-सुथरे सचेत रहें गीता हम।
हार जायेगा जरूर भक्षक ʼकरोनाʼ है।।
अपनी परंपराओं को हैं भूले आज हम।
जिसका नतीजा ही तो आज यह ʼकरो नाʼ है
संस्कारों से बिहीन हो गये हैं आज हम।
नवपीढ़ी भटकी है उसको संगोना है।।
अपने बुजुर्गों की सीख को ही भूल गये।
परिणाम हुआ यह कि आंसुओं को ढोना है।।
अभी भी समय है जाग जायें सभी बहन-बन्धु।
नहीं तो पड़ेगा अभी आगे और रोना है।।

रचनाकार-
डा. गीता सिंह चौहान