देशी बीज, देशी खाद, अरहर के एक पेड से ली दो किलो की पैदावार

by shubham

हमीरपुर: जिले के किसानों के लिये कारीमाटी के किसान राज बहादुर एक उदाहरण बन सकते है। एक अरहर के पेड़ से पिछले दो सालो से वह लगभग 2 किलो प्रति साल के हिसाब से अरहर पैदा कर रहे हैं । किसान राजबहादुर ने बताया कि उन्होने एक अरहर का पेड़ खेतो के मेड़ में लगाया था । यह बीज गाॅव के खेतिहर विजय पाल साहू से लाये थे। इस अरहर से पिछले दो साल में उसने 25 किलो अरहर प्रति पेड़ पैदा किया हैं। इस साल पेड़ में मकडी लगने से पैदावार कम हुई हैं, परन्तु लगभग डेढ़ किलो अरहर एक पैड से पैदा हुई हैं। अब वह अपने खेत के चारो तरफ मेड़ में अरहर लगाने का मन बनाये है ।

एक्रीसेट, काफरी और समर्थ फाउण्डेशन का सहयोग

किसानो की आमदनी को दोगुनी किये जाने का प्रयास अब रंग ला रहा हैं। वर्षा आधारित कृषि क्षेत्र में किसानो की आय को दो गुनी करने के मकसद से कृषि बागवानी के तहत कारीमाटी के किसान राजबहादुर के खेत में 200 सागौन के पेंड़ पिछले साल दिये थें। इनको रोपण कर किसान के द्वारा साल भर पानी और गोबर की खाद डाली गई। कारीमाटी के किसान राजबहादुर..ने बताया कि लगातार मेहनत व कृषि वैज्ञानिकों की तकनीकि परामर्श का नतीजा हैं, आज उनके खेत में 200 सागौन के पेड लगाये गये थे ,जिसमें केवल 2 पेड ही सूखे हैं । बाकी पेड हरे भरे हैं।


मालूम हो कि एक्रीसेट हैदराबाद के कृषि वैज्ञानिक धर्मेन्द्र कुमार, समर्थ के कार्यकर्ता शिवकुमार, अमित श्रीवास्तव लगातार किसानो की आय को बढाने के लिये कार्य कर रहें हैं। समर्थ के समन्वयक देवेन्द्र गाॅधी ने बताया कृषि तकनीकों, बीजों, बागवानी, चारागाह विकास, पशुपालन, कृतिम गर्भाधान व अन्य विभागो के साथ समन्वय करके सरकारी योजनाओं को किसानो तक पहुचाया जा रहा हैं।यह अपने आप मे उपलब्धि है।

4 माह से नही बदली मोटर, फसलें सूखने की कगार पर

किसान राजबहादुर को मलाल हैं कि उनके पास खुद का पानी नही हैं , एक अदद सरकारी नलकूप 129 है,जिस पर 32 उन किसानों की खेती निर्भर करती है जो जैविक खेती के लिए जुटे है ।इस पर निर्भर होकर उन्होने जैविक खेती की, इस साल जून में टयूबबैल की मोटर खराब होने पर, उन्होने उसे विभाग में जमा किया गया । परन्तु अभी तक उन्हे मोटर ठीक कराके नही दी गयी हैं । जिससे उनके 200 सागौन के पेड़ सूखने की कगार पर है ।इस साल बारिस कम हुई है । वही अन्य फसले भी सूखने की कगार पर है।

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