उज्जैन: ग्राम रुई तहसील घटिया में शासन द्वारा 116 बीघा जमीन पर प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। कब्जे के फैसले को लेकर संबंधित पक्ष ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि न्यायालय ने अपने आदेश में ऐसा कोई उल्लेख नहीं पड़ा है। ना ही अपने आदेश में न्यायलय ने सर्वे नंबर का उल्लेख किया हैै। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि सिलिंग एक्ट में सिविल न्यायालय को सुनवाई का अधिकार नहीं है।

उज्जैन सिटी प्रेस क्लब पर पत्रकारवार्ता में पत्रकारों को अपना पक्ष रखते हुए किसान रमेश ,विक्रम सिंह, संजय सिंह ,हाकम सिंह आदि किसान ने बताया कि उक्त भूमि रजिस्टर्ड विक्रय पत्र द्वारा श्रीमती कावेरी बाई द्वारा 1971 में खरीदी थी। वर्ष 1984 भाइयों के आपसी बंटवारा किया गया खसरा अभिलेख में भी उसको सभी व्यक्तियों के नाम दर्ज है। आरोप लगाते हुए बताया कि शासनादेश 1976 के आधार पर उक्त भूमि को अपनी बता रहा है उसे सर्वे नंबर का कोई उल्लेख नहीं है।

Also Read: उज्जैन: जहरीली शराब मामले में SP का तबादला, नए SP होंगे सतेन्द्र शुक्ला

बावजूद इसके शासन ने भूमि पर कब्जा लेने के लिए एक पक्षीय कार्रवाई करी है। पटवारी संजय शर्मा ने पूर्व में कार्यवाही ना करने के लिए 2 लाख रुपये लिए थे बाद में 5 लाख रुपये की और मांग करी जिसे पूरा नही करने पर पटवारी ओर तहसीलदार ने कार्यवाही करवाई है।

दुसरी और प्रशासन का कुछ और कहना है। प्रशासन का कहना है कि उन्होने कनून के मद्देनजर सही कार्यवाही कि है। अफसरों का बयान है कि “हमारे द्वारा जमीन पर कोई कब्जा नही किया गया है उक्त जमीन हमारी है हम न्याय के लिये आगे लड़ेंगे।”