वैदिक ज्योतिष के आईने में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप

by saurabh

डॉनल्ड जॉन ट्रंप संयुक्त राज्य अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति हैं। राजनीति में कदम रखने से पूर्व वह एक सफल उद्यमी और टेलीविजन पर्सनालिटी रह चुके हैं। वह अमेरिका में रियल एस्टेट के कारोबार से भी जुड़े हैं और अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। वे खुद को अमेरिका के ग्रेटेस्ट प्रेसिडेंट, मिस्टर ब्रेक्जिट, योर फेवरेट प्रेसिडेंट, किंग ऑफ डेब्ट, टैरिफ मैन, प्रेसिडेंट टी, प्रेसिडेंट ट्रंप और द चूज़ेन वन के नाम से भी बुलाना पसंद करते हैं।

यदि वैदिक ज्योतिष की आईने में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कुंडली को खंगाला जाए तो हम देखते हैं कि उनका जन्म 14 जून 1946 को सुबह 10:54 पर जमैका क्वींस में हुआ था।

इनका जन्म सिंह लग्न और वृश्चिक राशि में हुआ है तथा जन्म नक्षत्र ज्येष्ठा है।
नवम भाव का स्वामी मंगल जो कि चतुर्थ स्थान का स्वामी होकर योग कारक भी है, इनके लग्न में विराजमान होकर प्रबल राजयोग बना रहा है। मंगल की स्थिति इन्हें रियल एस्टेट का सफल कारोबारी भी बनाती है।
लग्न का स्वामी सूर्य दशम भाव में दिग् बली स्थिति में है लेकिन राहु के साथ होने पर थोड़ा पीड़ित भी है। राहु के साथ सूर्य की युति ग्रहण दोष का निर्माण कर रही है।

दूसरे भाव में कन्या राशि का बृहस्पति विराजमान है जोकि वक्री है और शनि से दृष्ट भी है।
चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि का नीच राशि का चंद्रमा केतु के साथ विराजमान है और उस पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि है। केतु के साथ चंद्रमा की स्थिति ग्रहण दोष का निर्माण कर रही है।
एकादश भाव में स्वराशि का बुध अच्छी स्थिति में है। इसने इनको व्यापार में बहुत लाभ दिया है।
द्वादश भाव में कर्क राशि का शनि शुक्र के साथ विराजमान है। इनकी कुंडली में शुक्र और शनि वर्गोत्तम अवस्था में भी हैं।

यदि भाव चलित कुंडली पर नजर डालें तो सूर्य, राहु और बुध तीनों ही एकादश भाव में स्थित हैं। यह स्थिति जीवन में आर्थिक तौर पर बहुत ऊँचाइयों को दर्शाती है।

अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप

वे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवार बने और अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन जोकि डेमोक्रेटिक पार्टी से उम्मीदवार थीं, उन्हें पराजित किया और इस प्रकार 9 नवंबर 2016 को डॉनल्ड ट्रंप संयुक्त राज्य अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति बने। उस समय वे राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा से गुज़र रहे थे और दशा छिद्र में थे। राहु अपनी प्रबल राशि वृषभ में दशम भाव में बैठा है और सूर्य के साथ विराजमान है तथा मंगल के नक्षत्र में है और मंगल केतु के नक्षत्र में है। इस प्रकार राहु ने इन्हें मंगल के फल भी प्रदान किए और सूर्य के साथ बैठकर सूर्य के अनुसार भी परिणाम दिए, जिसकी वजह से यह राष्ट्रपति जैसे बड़े पद पर सुशोभित हुए। इनके लिए राहु प्रबल लाभदायक स्थिति में है।

महाभियोग और बरी
19 दिसंबर 2019 को डॉनल्ड ट्रम्प के खिलाफ अमेरिकी संसद में महाभियोग अभियान चलाया गया। यह वह समय था, जब इनकी कुंडली में साढ़ेसाती अपने अंतिम चरण में थी और गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा चल रही थी। गुरु बृहस्पति मंगल के नक्षत्र में हैं और शनि बृहस्पति के नक्षत्र में स्थित हैं। बृहस्पति पांचवें और आठवें भाव के स्वामी हैं तथा शनि छठे और सातवें भाव के स्वामी होकर बारहवें भाव में विराजमान हैं। इस समय में प्रत्यंतर दशा शुक्र की और सूक्ष्म दशा भी शुक्र की ही चल रही थी जो कि तीसरे और दसवें भाव का स्वामी भी है तथा बारहवें भाव में विराजमान है।

5 फरवरी 2020 को इन्हें महाभियोग के दोनों आरोपों से मुक्त करके महाभियोग की कार्यवाही से बरी कर दिया गया। तब तक इन की साढ़ेसाती उतर चुकी थी और सूक्ष्म दशा राहु की मिली जो कि उन्हें एक बार फिर से स्थापित करने में कामयाब हुआ। इनकी कुंडली में राहु का कमाल साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। राहु सूर्य के साथ होने से ग्रहण दोष भी बना रहा है, जिससे उनकी छवि संदिग्ध बनी रहती है और इन पर आरोप-प्रत्यारोप जारी रहते हैं लेकिन यही राहु मंगल और सूर्य के फल भी दे रहा है और इन्हें प्रबल रूप से मजबूत बना रहा है।

2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डॉनल्ड ट्रंप के सितारे
वर्ष 2020 में नवंबर के महीने में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं, जिसमें डॉनल्ड ट्रंप एक बार फिर से दावेदार हैं। यदि इनकी ग्रह दशा पर नजर दौड़ाई जाए तो उस समय गुरु बृहस्पति की महादशा, शनि की अंतर्दशा और राहु की प्रत्यंतर दशा चल रही होगी। इस दशा की वजह से यह कहा जा सकता है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद राहु इनके पक्ष में आ सकता है क्योंकि सितंबर के महीने से राहु वृषभ राशि में ही आ जाएगा और इनकी कुंडली में भी राहु इसी राशि में स्थित है।

बृहस्पति का गोचर भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जो कि 20 नवंबर तक धनु राशि में स्थित होगा। देव गुरु बृहस्पति चंद्र राशि से दूसरे तथा लगन से पांचवे भाव में गोचर करेंगे। इस समय खण्ड में शनिदेव इनकी चंद्र राशि से तीसरे और लग्न से छठे भाव में होंगे जो कि इनके विरोधियों को हराने तथा चुनावों में जीतने की और अच्छा संकेत दे रहे हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि एक बार फिर राहु की कृपा इन्हें मिल सकती है और यह जीत की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

आचार्य पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान

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