सहारनपुर : सनी देओल ने जब फिल्म में हैंडपंपों उखाड़ा तो फिल्म का रंग जम गया था। हैंडपंप उखाड़ना लोगों को खूब पसंद आया था। हैंडपंप वाली सीन से ही फिल्म में चार चांद लग गए थे। और इन दिनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी हैंडपंप को लेकर सियासी गदर मची हुई है। सहारनपुर में एक हैंडपंप प्रशासन के लिए पनौती बन गया है। दरअसल एक शिकायत पर हैंडपंप को उखाड़े जाने के बाद इस पर राजनीति शुरू हो गई है. कांग्रेस ने हैंडपंप को उखाड़े जाने का विरोध किया है तो वहीं, बजरंग दल इसे लगाने के खिलाफ है. वहीं, इस पूरे विवाद में अब भीम आर्मी भी कूद गई है।

आखिर क्यों मची हैंडपंप पर सियासी गदर

आपको बता दें कि यह मामला सहारनपुर के बेहट का है। जहां सड़क के किनारे लगे एक हैंडपंप को दुकानदार मुरारी झा की शिकायत पर प्रशासन ने उखाड़ दिया था। दुकानदार का कहना था कि हैंडपंप पर लोग पानी पीते हैं और उसकी दुकान के आगे भीड़ लग जाती है। भीड़ के कारण उसकी दुकानदारी प्रभावित हो रही थी। इसलिए उसने प्रशासन से हैंडपंप को उखड़वाने की अपील की थी।

दुकानदार की अपील पर प्रशासन द्वारा हैंडपंप को सड़क के किनारे से हटवा दिया गया। लेकिन तभी हैंडपंप को लेकर सियासी गदर शुरू हो गई। कांग्रेस की विधायक एवं कार्यकर्ता दल बल के साथ हैंडपंप उखाड़े जाने का विरोध करने लगे। और हैंडपंप को दोबारा लगवाने की मांग को लेकर मंगलवार को धरना स्थल पर जा रहे कांग्रेस विधायकों नरेश सैनी और मसूद अख्तर को पुलिस अधिकारियों ने रोक लिया। बेहट से विधायक सैनी ने दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद उन्हें रिहा कराने के लिए समर्थकों के साथ पुलिस लाइन पहुंचे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने दोनों को रिहा कर दिया है‌। कांग्रेसियों ने जब धरना दिया तो प्रशासन ने हैंडपंप को दोबारा लगाए जाने का आश्वासन दिया जिसके बाद कांग्रेस नेता मान गए। भीम आर्मी के लोग भी हैंडपंप लगाने की मांग कर रहे हैं।

हैंडपंप की “सियासी गदर” में बजरंग दल विपक्ष में

वहीं, प्रशासन के आश्वासन के बाद बजरंग दल विरोध पर उतर आया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हैंडपंप दोबारा लगाये जाने का विरोध किया है। बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थाने में प्रदर्शन भी किया‌। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर प्रदर्शन की धमकी भी दी है।

वहीं, दुकानदार ने धमकी दी कि अगर हैंडपंप फिर लगाया गया तो उन्हें मजबूरन पलायन करना पड़ेगा।