संसद सत्र से ठीक पहले ऐ सवाल पूछने वाले तू कहां नदारद है?

by News Desk
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संसद का सत्र सोमवार 14 सितंबर से शुरू होने जा रहा है, छह महीने बाद होने जा रहा है और लगातार 18 दिन काम होने वाला है, लेकिन कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य जांच के लिए पूर्व और भावी (?) अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दो सप्ताह के लिए विदेश चली गई हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  1. सोनिया गांधी आम तौर पर विदेश में ही इलाज कराती हैं। तो क्या ऐसा माना जा सकता है कि वे जानती हैं कि उनके परिजनों और खुद उन्होंने भी कुल 55 साल के शासनकाल में भारत में एक भी ऐसा अस्पताल नहीं बनवाया, जहां वे अपना इलाज करा सकें?
  2. सोनिया गांधी, उनके परिवार या उनकी पार्टी की तरफ से आम तौर पर यह भी नहीं बताया जाता कि वे किस देश जा रही हैं और उन्हें क्या समस्या हुई है, जिसका इलाज या तो भारत में नहीं है या फिर भारत के इलाज पर उन्हें भरोसा नहीं है।
  3. राहुल गांधी और सोनिया गांधी ये दोनों विपक्ष के सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन देश और संसद सत्र से दो सप्ताह के लिए ऐसे समय में अनुपस्थित रहेंगे, जबकि चीन के साथ हमारा तनाव गंभीर मोड़ पर है।
  4. अभी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी लगातार दो-तीन बार बीमार पड़े हैं, लेकिन वे पहले मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम में भर्ती हुए थे और फिलहाल एम्स दिल्ली में भर्ती हैं। इतना ही नहीं, हर बार यह भी बताया गया है कि उन्हें क्या समस्या हुई है।
  5. पिछले कुछ वर्षों में दिवंगत हुए बीजेपी के सभी महत्वपूर्ण नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, मनोहर पर्रिकर, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज आदि के बारे में लोगों को यह पता था कि उन्हें क्या समस्या हुई है। इतना ही नहीं, भारतीय डॉक्टरों की सलाह पर ये नेता एकाध बार कभी विदेश गए होंगे तो गए होंगे, पर अपना इलाज मुख्य रूप से भारत में ही कराया।

राजनीति में हर घटना एक सन्देश है

राजनीति में हर घटना, बयान, व्यवहार, प्रकटीकरण या अप्रकटीकरण जनता के लिए एक संदेश होता है। सोनिया और राहुल इस बात को नहीं समझते। उन्हें समझाएंगे तो वे आपको बीजेपी का एजेंट बताएंगे। कथित रूप से ग़ुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल समेत अपने ही कई नेताओं को भी बीजेपी का एजेंट बता चुके हैं, केवल इस कारण से कि उन्होंने पार्टी से एक पूर्णकालिक और सक्रिय अध्यक्ष की मांग कर दी थी।

सवाल है कि जब संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले चीन से तनाव, बढ़ते कोरोना संक्रमण और अर्थव्यवस्था की बदहाली के दौर में भी आप पार्टी, सरकार या देश से संवाद करने के लिए उपलब्ध रहेंगे नहीं, तो पार्टी नेताओं को पूर्णकालिक सक्रिय अध्यक्ष की ज़रूरत महसूस क्यों नहीं होगी?

विपक्ष का काम है सरकार से सवाल पूछना और वही नदारद है

अब तमाशा देखिए। कांग्रेस के दोनों बड़े नेता विदेश में रहेंगे और संसद में पार्टी की तरफ से बोलेंगे वे लोग, जो पहले ही कथित रूप से सरकार (बीजेपी) के एजेंट घोषित हो चुके हैं। ये हाल है हमारे देश में मुख्य विपक्षी दल का। लेकिन जब मैं यह रेखांकित कर रहा हूँ, तो सारे भाजपा-विरोधी सोशल मीडिया वारियर्स मुझे पत्रकारिता का पाठ पढ़ाने चले आएंगे। बताएंगे कि पत्रकार का काम केवल सरकार से ही सवाल पूछना है, विपक्ष से पूछने के लिए मंगल ग्रह से एलियन आएंगे। उनके गिरोह के एक प्रकांड पत्रकार ने उन्हें ऐसा ही उल्टा ज्ञान दे दिया है।

तो भैया, सरकार से संसद में सवाल पूछना किसी पत्रकार का नहीं, बल्कि विपक्ष का काम है। और संसद से बाहर भी मान लीजिए जैसा आप कहते हैं कि पत्रकारों में सवाल पूछने की हिम्मत नहीं है, तो आप पूछिए न। सांसदी, विधायकी, अध्यक्षी, उपाध्यक्षी, गाड़ी, बंगले, सुरक्षा, तामझाम आपके पास हैं। कल को आपकी सरकार बन जाएगी तो मंत्री, प्रधानमंत्री भी आप ही बनोगे, सुख-सुविधाएं राजसी ठाट बाट भी आप ही भोगोगे, और आपके स्वार्थ के लिए सवाल हम पूछें?

मतलब यह कि जिस विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, जब वही नदारद है, तो पूछूं नहीं कि ऐ सवाल पूछने वाले, तू कहां नदारद है?

डिस्क्लेमर: ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि सोनिया गांधी जल्द स्वस्थ हो जाएं और सौ साल जिएं। यह पोस्ट उनके बीमार होने पर नहीं, उनके व्यवहार और उनकी राजनीति पर टिप्पणी है। सहानुभूति, सम्वेदनशीलता और सद्भावनाओं में मेरी तरफ से कोई कमी नहीं है।

अभिरंजन कुमार– वरिष्ठ पत्रकार

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