जोहरा सहगल: जिन्हें आज के ही दिन सर्वोच्च सम्मान ‘ पाल्मे डी’ओर ‘ से नवाजा गया था

by mansi
Zohra Mumtaz Sehgal won the highest award

साहिबज़ादी ज़ोहरा मुमताज़ुल्लाह खान बेगम का जन्म 27 अप्रैल, 1912 को सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। मां ने इनका नाम – जोहरा रखा । जोहरा का मतलब होता है एक हुनरमंद लड़की। पर बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने अपनी सर से मां का साया खो दिया। उनकी मां की आखिरी इच्छा थी कि बेटी ग्रेजुएशन करे । जोहरा सहगल ने 1929 में मेट्रिक पास किया और 1933 में लाहौर के क्वीन मेरी कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया।

जिसके नाम का मतलब ही ‘हुनरमंद’, हो भला उसे अपने नाम का परिचय देने की क्या ज़रूरत। अपने नृत्य और अभिनय से सबका दिल जीतने वाली जोहरा के नाम को कौन नहीं जानता। वह एक राजघराने से आती थीं जहां नाचना-गाना एक बुरी चीज़ माना जाता था। साथ ही, रुढ़िवादी मुस्लिम परिवार उन्हें किसी भी कीमत पर नृत्य नहीं करने देता।

25 बरस की जोहरा भी अपने सपनों को यूँ नहीं दम तोड़ते हुए देख सकती थीं। उन्हें पता था कि अगर अपने सपनों को पूरा करना है तो खुद ही कुछ करना पड़ेगा।

जोहरा सहगल के सपनों की शुरूआत

जोहरा अपने रिश्तेदारों के साथ पहले विदेश यात्रा पर गईं और बाद में वहीं जर्मनी के एक मशहूर डांस स्कूल में दाखिला ले लिया। यहां से जो सिलसिला शुरू हुआ उसे सन् 1935 में रफ़्तार मिली जब वे पंडित उदयशंकर की नृत्य मंडली में शामिल हुईं। बैले नर्तक पंडित उदयशंकर, प्रसिद्ध सितारवादक पंडित रविशंकर के बड़े भाई थे। पंडित उदयशंकर के साथ उन्होंने जापान, सिंगापुर, रंगून और दुनियाभर के तमाम देशों में प्रस्तुति दी। इस बार भारत लौटकर आने तक जोहरा सहगल बतौर कलाकार प्रसिद्ध हो चुकी थीं। जोहरा भारत में आने के बाद मुंबई के ‘इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा)’ का हिस्सा बन गई थी।इसी की मदद से उन्होंने साल 1946 में आई फिल्म ‘नीचा नगर’ से बॉलीवुड में कदम रखा। उनके द्वारा निभाया गया ये किरदार बहुत छोटा था। उनके बॉलीवुड करियर की शुरुआत यहीं से हुई थी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रोत्साहन पाने वाली यह पहली भारतीय फिल्म थी।इस फिल्म ने कान फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड जीता था।

1939 में पंडित उदयशंकर ने अलीगढ़ में एक डांस अकादमी खोली। जिसका नाम ‘उदयशंकर सांस्कृतिक केंद्र’ था।अब जोहरा यहीं बतौर डांस टीचर काम करने लगीं। वह अकादमी में युवाओं को नृत्य सिखाती थीं।इसी दौरान उनके जीवन में प्यार ने दस्तक दी। दरअसल, उन्हें अकादमी में नृत्य सीख रहे एक छात्र से प्यार हो गया। इंदौर से आए उनके छात्र कामेश्वर सहगल से वह आठ साल बड़ी थीं। ये सब न सोचते हुए अपने जीवन की शुरुआत की और इस प्यार को उन्होंने शादी का नाम दिया। कामेश्वर भी नृत्य और पेंटिंग के बहुत शौक़ीन थे। कुछ ही दिनों बाद दोनों ने मिलकर एक डांस अकादमी खोली। लाहौर में खुली इस अकादमी का नाम जोरेश डांस इंस्टिट्यूट था।

पति के आत्महत्या करने के बाद का जीवन

आपको बता दें कि जोहरा के पति कामेश्वर साल ने 1959 में डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली थी। अपने पति की मृत्यु के बाद जोहरा अकेली पड़ गईं। लिहाज़ा, पति की मृत्यु के तीन साल बाद लंदन चली गई। एक कलाकार जहाँ रहता है वहीं अपने कला के रंग बिखेरने लगता है कुछ ऐसा ही जोहरा के साथ भी था।

लंदन जाकर उन्होंने फिल्म, टीवी और रेडियो में काम किया।जिसमें से उन्होंने कुछ प्रसिद्ध अंग्रेजी फिल्मों जैसे ‘नेवर से डाई’, ‘रेड बिंदी’, ‘पार्टीशन’, और ‘तंदूरी नाइट्स’ में काम किया।

इनके फैन लिस्ट में बॉलीवुड की अभिनेत्री करीना कपूर भी इनके ही जैसा बनना चाहती हैं जिन्होंने ये कहा था कि वो 80 साल की उम्र में जोहरा की तरह दिखने की चाह रखती हैं।

102 साल की उमर में जब उन्होंने दुनियावी मुश्किलों को अलविदा कहा तब भी वे उतनी ही खुशदिल और जीवंत थीं, जितनी अपने 80 बरस के कैरियर में रहीं। जिंदगी के पूरे 80 साल जोहरा सहगल ने अभिनय और नृत्य किया। नृत्य के प्रति उनकी दीवानगी 19वीं शताब्दी की प्रसिद्ध अमेरिकी डांसर इजाडोरा डंकन से प्रेरणा पाकर बढ़ी और बाद में जोहरा हिंदुस्तान की इजाडोरा कहलाईं। उनके खट्टे-मीठे किरदारों की तस्वीर हर किसी के ज़हन में आज भी ताज़ा है।

रिपोर्ट- वैशाली

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