चेन्नई | न्यूज़ डेस्क
तमिल सिनेमा के ‘इलायथलपति’ और अब राजनीति की ओर कदम बढ़ा चुके सुपरस्टार विजय एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई रिकॉर्ड तोड़ कमाई नहीं, बल्कि एक कानूनी विवाद है। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने न केवल फिल्म के निर्माताओं बल्कि करोड़ों प्रशंसकों को भी चिंता में डाल दिया है। अदालत ने फिल्म की रिलीज पर फिलहाल ‘ब्रेक’ लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला? क्यों लगा रिलीज पर ग्रहण?
फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब एक पक्ष ने इसके टाइटल और कहानी के कुछ हिस्सों पर अपने कॉपीराइट का दावा किया। मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के शीर्षक और पटकथा से जुड़े कुछ कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।
अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह पाया कि इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है। जस्टिस की पीठ ने निर्देश दिया कि जब तक इस विवाद का पूर्ण निस्तारण नहीं हो जाता, फिल्म को सिनेमाघरों या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया जा सकता।
प्रशंसकों को लगा बड़ा झटका
विजय की फिल्में दक्षिण भारत के साथ-साथ अब उत्तर भारत में भी जबरदस्त क्रेज रखती हैं। ‘जन नायकन’ को लेकर सोशल मीडिया पर महीनों से माहौल बना हुआ था। जैसे ही कोर्ट के स्टे की खबर वायरल हुई, ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म के समर्थन में हैशटैग ट्रेंड करने लगे। फैंस उम्मीद कर रहे थे कि विजय की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर देगी, लेकिन अब उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
विजय का राजनीतिक करियर और फिल्म का कनेक्शन
हाल ही में थलपति विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का ऐलान किया है। फिल्म ‘जन नायकन’ (जिसका अर्थ ‘जनता का नायक’ होता है) के नाम को उनके राजनीतिक उदय से जोड़कर देखा जा रहा था। जानकारों का मानना है कि यह फिल्म उनकी राजनीतिक छवि को मजबूत करने के लिए एक बड़ा हथियार साबित हो सकती थी। कोर्ट का यह ‘जोल’ (झटका) उनके फिल्मी और राजनीतिक सफर के तालमेल के बीच एक बाधा की तरह देखा जा रहा है।
मेकर्स की अगली रणनीति क्या होगी?
सूत्रों के अनुसार, फिल्म के निर्माता इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। निर्माताओं का तर्क है कि फिल्म पर भारी निवेश किया गया है और रिलीज में देरी से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होगा। हालांकि, जब तक कोर्ट स्टे ऑर्डर नहीं हटाता, तब तक फिल्म के भविष्य पर काले बादल मंडराते रहेंगे।
