कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर के पॉश इलाके रतनलाल नगर में बुधवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब शिक्षा विभाग में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान 40 वर्षीय उपेन्द्र सिंह के रूप में हुई है। उपेंद्र शिक्षा विभाग के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में जूनियर असिस्टेंट (बाबू) के पद पर तैनात थे।
सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर कब्जे में लिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
नेपाल से कानपुर तक का सफर, पर घर में था ‘कलह’ का साया
उपेन्द्र सिंह मूल रूप से पड़ोसी देश नेपाल के सुर्खेत क्षेत्र के निवासी थे। वह लंबे समय से कानपुर में रहकर सरकारी सेवा दे रहे थे। वह अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। बाहर से खुशहाल दिखने वाले इस परिवार के भीतर लंबे समय से विवाद की चिंगारी सुलग रही थी, जिसका अंत इतना भयावह होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
बहन का आरोप: “भाभी खाना तक नहीं देती थीं”
हादसे के बाद मृतक की बहन ने अपनी भाभी यानी उपेंद्र की पत्नी पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। बहन का कहना है कि उपेंद्र पिछले काफी समय से मानसिक तनाव (Depression) में थे।
“मेरे भाई को घर में प्रताड़ित किया जाता था। भाभी उन्हें समय पर भोजन तक नहीं देती थीं और छोटी-छोटी बातों पर मानसिक रूप से परेशान करती थीं। इसी प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया है।” — मृतक की बहन
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन भी पति-पत्नी के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जिसके बाद उपेंद्र ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही बेसिक शिक्षा कार्यालय के अन्य कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए। विभाग में उपेंद्र को एक शांत और मेहनती कर्मचारी के रूप में जाना जाता था।
थाना प्रभारी का बयान: पुलिस के अनुसार, मामला प्रथम दृष्टया पारिवारिक कलह के कारण आत्महत्या का लग रहा है। कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस उपेंद्र के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और हालिया मैसेजेस की जांच कर रही है ताकि मौत की असली वजह का पता लगाया जा सके। पुलिस ने बताया कि यदि परिजनों की ओर से तहरीर मिलती है, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल: कलह जब जान ले ले
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि घरेलू विवाद किस कदर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि कार्यस्थल और घर के बीच बढ़ता तनाव और संवाद की कमी ऐसे आत्मघाती कदमों की मुख्य वजह बनती है।
