यूपी विधानसभा में बिजली पर 'हाई वोल्टेज' ड्रामा: स्मार्ट मीटर और निजीकरण को लेकर भिड़े सत्ता-विपक्ष - NewsKranti

यूपी विधानसभा में बिजली पर ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा: स्मार्ट मीटर और निजीकरण को लेकर भिड़े सत्ता-विपक्ष

यूपी विधानसभा बजट सत्र 2026: स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने। ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।

admin
By
admin
2 Min Read
ख़बर एक नज़र में :
  • सदन में हंगामा: समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया।
  • निजीकरण पर रार: विपक्ष का आरोप- सरकार बिजली विभाग को निजी हाथों में बेच रही है, जिससे दरें बढ़ेंगी।
  • सरकार का पक्ष: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने दावा किया कि यूपी आज देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति वाला राज्य है।
  • स्मार्ट मीटर का सच: सरकार ने कहा- स्मार्ट मीटर पारदर्शी हैं और इनसे रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा।
  • किसानों को राहत: मंत्री ने याद दिलाया कि यूपी किसानों को मुफ्त बिजली देने वाला पहला राज्य है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 2026 सियासी अखाड़ा बन गया है। गुरुवार और शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान बिजली की बढ़ती दरों, स्मार्ट मीटरों की कथित ‘लूट’ और विभाग के निजीकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। शून्य प्रहर में समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव लाकर बिजली संकट और उपभोक्ताओं के उत्पीड़न का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।

विपक्ष का प्रहार: “स्मार्ट मीटर के नाम पर हो रही जेब साफ”

सपा विधायक फहीम इरफान और राम सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरों की गति तेज है और उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिल थमाए जा रहे हैं। कांग्रेस की आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग की बिना संस्तुति के स्मार्ट मीटरों का खर्च जनता पर डालना शोषण है। विपक्ष ने दावा किया कि बिजली अब विलासिता की वस्तु बनती जा रही है और गरीब मजदूर प्रीपेड व्यवस्था के बोझ तले दब रहा है।

ऊर्जा मंत्री का पलटवार: “लालटेन युग की याद दिलाई”

जवाब देने उतरे ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों को “बिजली देखने के लिए विशेष चश्मे” की जरूरत है क्योंकि उन्हें विकास दिखाई नहीं दे रहा। मंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले राज्य में बिजली की जो स्थिति थी, उसे सुधार कर आज गांवों को 18-20 घंटे और शहरों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है।

- Advertisement -

निजीकरण पर पुरानी सरकारों को घेरा

निजीकरण के मुद्दे पर मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत और रास्ता कांग्रेस व सपा की सरकारों ने ही दिखाया था। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछली सरकारों के समय बिजली महंगी खरीदी जाती थी, जबकि वर्तमान ‘डबल इंजन’ सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Share This Article