लखनऊ, 24 जनवरी:
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार द्वारा जारी जनगणना की अधिसूचना को लेकर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने जनगणना के प्रारूप में ‘जाति’ का कॉलम न होने पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के हक और अधिकारों को छीनने वाली एक “भाजपा-ई साजिश” करार दिया है।
“गिनेंगे क्या?” – अखिलेश का सीधा सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सपा मुखिया ने लिखा, “जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, तो फिर गिनेंगे क्या? जातिगत जनगणना भी भाजपा का एक और बड़ा जुमला साबित हुई है।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का सीधा फॉर्मूला है—न गिनती होगी, न आनुपातिक आरक्षण या अधिकार देने का कोई जनसांख्यिकीय आधार बनेगा।
भाजपा कार्यकर्ताओं पर निशाना
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के वे नेता और कार्यकर्ता जो अब तक अपनी जातियों के बीच जाकर जातिगत जनगणना का दावा कर रहे थे, वे अब समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि अब लोग अपने घरों और वाहनों से भाजपा का झंडा उतारने पर मजबूर हो जाएंगे क्योंकि वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
‘छलजीवी’ और ‘बेशर्म’ जैसे शब्दों का प्रयोग
सपा अध्यक्ष ने भाजपा को ‘छलजीवी’ और ‘बेशर्म’ बताते हुए कहा कि अगर अब विरोध बढ़ेगा, तो भाजपा इसे “टाइपिंग मिस्टेक” बताकर पल्ला झाड़ लेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि अब शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी भाजपा’ का अर्थ ‘धोखा’ लिख देना चाहिए। अखिलेश ने PDA समाज से आह्वान किया कि उन्हें अपने मान-सम्मान और हक के लिए खुद ही लड़ाई लड़नी होगी।
