नई दिल्ली | विशेष संवाददाता दिल्ली की आबकारी नीति और शराब की बिक्री एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राजधानी की सरकारी शराब दुकानों के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की व्यापक जांच और ऑडिट के आदेश दिए हैं। यह फैसला खातों में मिली प्रारंभिक अनियमितताओं और वित्तीय कुप्रबंधन के संदेह के बाद लिया गया है।
4 प्रमुख एजेंसियों पर गिरेगी ‘गाज’
मुख्यमंत्री के आदेश के तहत दिल्ली की उन चार प्रमुख सरकारी एजेंसियों का ऑडिट किया जाएगा जो शराब की खुदरा बिक्री (Retail Sale) का संचालन करती हैं। इनमें शामिल हैं:
- DSIIDC (दिल्ली राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम)
- DTTDC (दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम)
- DCCWS (दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार)
- DSCSC (दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम)
ये चार एजेंसियां मिलकर दिल्ली में 700 से ज्यादा शराब की दुकानें चलाती हैं। अब इन सभी के स्टॉक, खरीद, बिक्री और कैश बैलेंस का बारीकी से मिलान किया जाएगा।
दो महीने में सौंपनी होगी ‘डेडलाइन’ रिपोर्ट
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, ऑडिट करने वाली टीमों को अगले दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपनी होगी। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि वित्तीय लापरवाही या भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि ऑडिट में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आबकारी आयुक्त करेंगे स्वतंत्र जांच
ऑर्डर के मुताबिक, आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) स्वतंत्र रूप से राजस्व, स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे। यह कदम फाइनेंस डिपार्टमेंट की उस प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद उठाया गया है जिसमें बताया गया था कि लंबे समय से खातों का मिलान (Reconciliation) नहीं किया गया है, जिससे गबन की आशंका बढ़ गई है।
