नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क): देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर शराब की दुकानों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शोएब जमाई ने मुख्यमंत्री आतिशी को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि पवित्र महीने रमजान के दौरान दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को बंद रखा जाए। इस मांग के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है शोएब जमाई की मुख्य मांग?
डॉ. शोएब जमाई ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि रमजान का महीना इबादत और पवित्रता का प्रतीक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जिस तरह अन्य राज्यों में त्योहारों के अवसर पर ‘ड्राई डे’ घोषित किया जाता है, उसी तर्ज पर रमजान के तीस दिनों के लिए दिल्ली में शराब की बिक्री पर रोक लगानी चाहिए। जमाई का कहना है कि यह कदम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
सीएम आतिशी को लिखे पत्र के मुख्य बिंदु
शोएब जमाई ने पत्र में शराब के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कई बातें कही हैं:
- धार्मिक आस्था का सम्मान: पत्र में कहा गया है कि रमजान के दौरान लाखों लोग उपवास (रोजा) रखते हैं और मस्जिदों में भीड़ होती है। ऐसे में शराब की दुकानों का खुला रहना माहौल बिगाड़ सकता है।
- सामाजिक सुरक्षा: उन्होंने यह भी तर्क दिया कि खुले में शराब पीने वालों के कारण इबादत के लिए जाने वाले लोगों को परेशानी होती है।
- ड्राई डे का विस्तार: उन्होंने मांग की कि सरकार को अपनी आबकारी नीति (Excise Policy) में बदलाव कर पूरे रमजान महीने को ‘ड्राई पीरियड’ घोषित करना चाहिए।
विवादों से रहा है पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में शराब की दुकानों को लेकर विरोध शुरू हुआ है। इससे पहले दिल्ली की पुरानी आबकारी नीति को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच लंबी जंग चल चुकी है। शोएब जमाई की इस मांग को सियासी जानकार मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। हालाँकि, अभी तक दिल्ली सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
जैसे ही शोएब जमाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने पत्र की जानकारी साझा की, लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहाँ कुछ लोग इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे ‘पर्सनल चॉइस’ और ‘रेवेन्यू’ का हवाला देकर विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार का काम है, लेकिन शराब बंदी जैसे फैसले संवैधानिक दायरे में रहकर होने चाहिए।
