नई दिल्ली/लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय ने ब्रिटेन में रह रहे इस्लामी उपदेशक मौलाना शम्सुल हुदा खान के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर बड़ी जांच शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश एटीएस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई इस जांच में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और अवैध रूप से करोड़ों रुपये जुटाने के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
शिक्षक की आड़ में कट्टरपंथ का नेटवर्क
आजमगढ़ का मूल निवासी शम्सुल हुदा खान 1984 में एक सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक नियुक्त हुआ था। ईडी के अनुसार, आरोपी ने न केवल भारतीय नागरिकता छोड़ने के बाद भी सरकारी खजाने को चूना लगाया, बल्कि शिक्षण कार्य की आड़ में अपना वित्तीय साम्राज्य खड़ा किया।
करोड़ों का विदेशी लेनदेन और संपत्तियां
जांच एजेंसियों ने पाया है कि मौलाना के भारत स्थित 7-8 बैंक खातों में पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। ये पैसे किन देशों से आए और इनका वास्तविक स्रोत क्या था, इसकी गहन जांच की जा रही है। इसके साथ ही, आजमगढ़ और संत कबीर नगर में स्थापित किए गए दो मदरसों का पंजीकरण पहले ही रद्द किया जा चुका है।
आतंकवादी संगठनों से संबंधों की जांच
शम्सुल हुदा पर आरोप है कि उसने धार्मिक शिक्षा की आड़ में युवाओं के बीच कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार किया। उसके तार ब्रिटेन के कट्टरपंथी संगठनों और पाकिस्तान के चरमपंथी समूहों से जुड़े होने के सबूत मिले हैं। ईडी अब उसके पूरे वित्तीय नेटवर्क और लेयरिंग के जरिए छुपाए गए धन की तलाश कर रही है।
