जालंधर/लुधियाना: साइबर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सोमवार (22 दिसंबर, 2025) को ED की जालंधर जोनल टीम ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम के 11 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह कार्रवाई लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति एस.पी. ओसवाल से हुई 7 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में की गई है।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ठगों ने लुधियाना के उद्योगपति एस.पी. ओसवाल को निशाना बनाने के लिए खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उन्हें फर्जी न्यायिक दस्तावेज और सरकारी नोटिस दिखाकर डराया गया और घंटों तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया। इस दौरान उनसे कुल 7 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए। पुलिस की तत्परता से 5.24 करोड़ रुपये तो रिकवर कर लिए गए, लेकिन बाकी रकम मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगा दी गई।
कौन है रूमी कलिता और क्या था उसका रोल?
जांच में सामने आया कि असम की निवासी रूमी कलिता इस पूरे गिरोह की अहम कड़ी है। वह उन फर्जी बैंक खातों (Mule Accounts) के लॉग-इन विवरण का प्रबंधन करती थी, जो गरीबों और मजदूरों के नाम पर खोले गए थे। इन खातों में पैसा आते ही रूमी उसे तुरंत कैश में निकाल लेती थी या अन्य खातों में लेयरिंग (Layering) के जरिए भेज देती थी। इस काम के बदले उसे ठगी की कुल रकम का एक निश्चित प्रतिशत कमीशन मिलता था।
ED की आगामी कार्रवाई
रूमी कलिता को गुवाहाटी से गिरफ्तार कर जालंधर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 2 जनवरी, 2026 तक 10 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया गया है। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के और भी बड़े चेहरों का पर्दाफाश होगा।
