देशभर में सस्ती हो सकती है बिजली, पावर ट्रेडिंग फीस घटाने की तैयारी में CERC – NewsKranti

देशभर में सस्ती हो सकती है बिजली, पावर ट्रेडिंग फीस घटाने की तैयारी में CERC

केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) पावर ट्रेडिंग एक्सचेंजों की ट्रांजैक्शन फीस कम करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे बिजली की कुल लागत घट सकती है और देशभर के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है।

Saniya Soni
2 Min Read
Highlights
  • CERC पावर ट्रेडिंग फीस को तर्कसंगत बनाने पर विचार
  • बिजली की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद
  • जनवरी 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकता है फैसला
  • बाजार समेकन से सभी एक्सचेंजों में एक जैसी कीमत
  • मौजूदा फीस लिमिट 2 पैसे प्रति यूनिट
  • नई प्रस्तावित फीस 1.5 पैसे प्रति यूनिट
  • TAM कॉन्ट्रैक्ट के लिए 1.25 पैसे प्रति यूनिट का सुझाव

देशभर के बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) पावर ट्रेडिंग एक्सचेंजों पर लगने वाली ट्रांजैक्शन फीस को कम करने और तर्कसंगत बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस कदम का सीधा असर बिजली की कुल लागत पर पड़ेगा, जिससे बिजली के दाम घटने की संभावना है।

CERC का मानना है कि पावर ट्रेडिंग फीस में सुधार से न सिर्फ बाजार की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि नकदी प्रवाह मजबूत होगा और अलग-अलग एक्सचेंजों में कीमतों के अंतर को भी खत्म किया जा सकेगा। इससे बिजली की खरीद-फरोख्त एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी व्यवस्था में हो सकेगी

बिजली बाजार के समेकन (Market Coupling) को CERC ने इस साल जुलाई में मंजूरी दी थी, जिस पर दो साल से ज्यादा समय तक विचार-विमर्श चला। इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग पावर एक्सचेंजों को एक ही सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि पूरे देश में बिजली की एक समान कीमत तय हो सके। इस योजना को जनवरी 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है।

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सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में CERC ने पावर एक्सचेंजों द्वारा वसूली जाने वाली ट्रांजैक्शन फीस की समीक्षा के लिए एक विचार-पत्र को अंतिम रूप दिया है। फिलहाल प्रति यूनिट अधिकतम 2 पैसे की फीस तय है, जिसे कई एक्सचेंज लगभग पूरी तरह वसूलते हैं।

अब CERC इस बात की जांच कर रहा है कि बढ़ते ट्रेड वॉल्यूम और एकीकृत मूल्य खोज व्यवस्था के दौर में यह फीस ढांचा कितना उपयुक्त है। प्रस्तावित विकल्पों में ज्यादातर ट्रेडिंग सेगमेंट के लिए प्रति यूनिट 1.5 पैसे की फिक्स्ड फीस शामिल है। वहीं, टर्म-अहेड मार्केट (TAM) कॉन्ट्रैक्ट के लिए 1.25 पैसे प्रति यूनिट की कम फीस का सुझाव दिया गया है, क्योंकि इन सौदों में ऑपरेशनल लागत अपेक्षाकृत कम होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सीधा फायदा बिजली वितरण कंपनियों और अंततः आम उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिससे देश में बिजली की कीमतें धीरे-धीरे सस्ती हो सकती हैं।

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