भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के आर्थिक रिश्तों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। पिछले कई महीनों की गहन चर्चा और कूटनीतिक प्रयासों के बाद, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मई 2026 के दूसरे सप्ताह से पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते को अमलीजामा पहनाने के अंतिम चरण में हैं।
इस समझौते के लागू होते ही न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं खत्म होंगी, बल्कि भारतीय उत्पादों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे।
99% भारतीय उत्पादों पर लगेगा ‘जीरो टैरिफ’
इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यूके को निर्यात किए जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा। भारत के प्रमुख सेक्टर जैसे कपड़ा (Textiles), चमड़ा और जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, खेल के सामान और खिलौनों को ब्रिटिश बाजार में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय विनिर्माताओं को चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ी बढ़त मिलेगी।
विदेशी शराब और लग्जरी कारें होंगी सस्ती
समझौते के तहत भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार के द्वार खोले हैं। स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले भारी-भरकम 150% आयात शुल्क को तुरंत घटाकर 75% कर दिया जाएगा और 2035 तक इसे मात्र 40% तक लाने का लक्ष्य है। वहीं, ब्रिटिश कारों (जैसे लैंड रोवर, जगुआर) पर लगने वाले 110% शुल्क को अगले पांच वर्षों में घटाकर मात्र 10% कर दिया जाएगा। इससे भारत में लग्जरी कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
DCC करार से कर्मियों को बड़ी राहत
व्यापार के अलावा दोनों देशों ने ‘दोहरा योगदान संधि’ (DCC) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह उन पेशेवरों के लिए वरदान साबित होगा जो काम के सिलसिले में भारत से यूके या यूके से भारत जाते हैं। अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा शुल्क (Social Security Contribution) दो बार नहीं देना होगा, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी।
2030 तक $56 अरब व्यापार का लक्ष्य
इस व्यापक आर्थिक और व्यापारिक करार (CETA) का मुख्य उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से दोगुना कर 56 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। भारत ने बिस्कुट, चॉकलेट और कॉस्मेटिक्स जैसे ब्रिटिश उपभोक्ता उत्पादों के लिए भी अपना बाजार खोल दिया है।
