Supreme Court on Stray Dogs Case:आवारा कुत्तों से जुड़े बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान बेहद अहम और सख्त टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर कैसे पता लगाया जाए कि कौन सा कुत्ता किसी को काटने के मूड में है और कौन नहीं। अदालत ने साफ कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और केवल पशु प्रेम के नाम पर नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़ना या शेल्टर में रखना न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से संभव। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है और कानून का पालन अनिवार्य है।
कोर्ट ने गेटेड कम्युनिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी सोसाइटी के 90 प्रतिशत लोग कुत्तों को बच्चों के लिए खतरा मानते हैं, तो 10 प्रतिशत की जिद नहीं चल सकती। अदालत ने यहां तक कहा कि कल कोई भैंस भी ले आए तो क्या होगा? इसलिए ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे गेटेड कम्युनिटी मतदान के जरिए फैसला ले सके।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि भारत में करीब 6.2 करोड़ आवारा कुत्तों की आबादी है और हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। कोर्ट ने पशु प्रेमियों को सुझाव दिया कि वे सड़कों पर नहीं बल्कि शेल्टर में मौजूद कुत्तों को भोजन कराएं।
गौरतलब है कि इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम के कुछ नियमों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई में “मानवता आखिर है क्या” विषय पर वीडियो दिखाने की बात कही थी। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
