अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत के निर्यात पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, युद्ध, सप्लाई चेन संकट और हाई टैरिफ के बीच भी भारतीय एक्सपोर्ट लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत का निर्यात 2020 में 276.5 अरब डॉलर था, जो 2021 में बढ़कर 395.5 अरब डॉलर और 2022 में 453.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि 2023 में इसमें गिरावट आई और यह 389.5 अरब डॉलर रहा, लेकिन 2024 में फिर से उछाल देखने को मिला और एक्सपोर्ट 443 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल गुड्स और सर्विस एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 825.25 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच ही 562 अरब डॉलर का निर्यात हो चुका है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए हाई टैरिफ के कारण सितंबर और अक्टूबर में निर्यात पर कुछ असर पड़ा, लेकिन नवंबर 2025 में भारत से अमेरिका के लिए एक्सपोर्ट 22.61 प्रतिशत बढ़कर 6.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि भारतीय निर्यातक तेजी से नई रणनीतियों और बाजारों की ओर बढ़ रहे हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, “व्यापार पानी की तरह होता है, जो अपना रास्ता खुद बना लेता है।” इसी रणनीति के तहत भारतीय निर्यातकों ने ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाया है, जो 2026 में लागू होने वाले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी भारत का निर्यात मजबूत बना रहेगा। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर की निरंतर मजबूती भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत बनाएगी।
