कानपुर। शहर की सरकार यानी नगर निगम में अब कामचोरी और जनता से बदतमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शुक्रवार को एक कड़ा संदेश देते हुए अनुशासनहीनता के आरोपी आउटसोर्स अवर अभियंता (JE) को तत्काल सेवा से पृथक (Terminated) करने का आदेश जारी कर दिया। मामला एक खराब स्ट्रीट लाइट की शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगाने और शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज करने से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 22 जनवरी 2026 को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने एक समाचार पत्र के कार्यालय से ‘फोन-इन’ कार्यक्रम के जरिए जनता की समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कर्रही निवासी रोहित कोच्चर ने शिकायत की थी कि उनके घर के पास की स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद है। नगर आयुक्त ने संबंधित मार्ग प्रकाश विभाग को 24 घंटे के भीतर समस्या समाधान के निर्देश दिए थे।
फोटो मंगवाकर किया ‘खेल’, फिर की बदतमीजी
जांच में सामने आया कि जोन-3 के अवर अभियंता (आउटसोर्स) अतुल सिंह ने शिकायतकर्ता से संपर्क तो किया, लेकिन समाधान के बजाय “डिजिटल चालाकी” दिखाने की कोशिश की। इंजीनियर ने रोहित से खराब लाइट की फोटो मांगी और फिर जो लाइटें जल रही थीं, उनकी जियोटैग फोटो मंगवाकर उन्हीं के आधार पर शिकायत का फर्जी निस्तारण (Closure) पोर्टल पर दिखा दिया।
जब शिकायतकर्ता रोहित कोच्चर ने देखा कि लाइट ठीक नहीं हुई और शिकायत बंद कर दी गई है, तो उन्होंने पुनः संपर्क किया। आरोप है कि इस पर इंजीनियर अतुल सिंह अपना आपा खो बैठे और उन्होंने शिकायतकर्ता के साथ अभद्र भाषा और अपशब्दों का प्रयोग किया।
नगर आयुक्त ने खुद की पड़ताल, गिरी गाज
मामला तब तूल पकड़ा जब पीड़ित ने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दोबारा शिकायत दर्ज कराई। 6 फरवरी को नगर आयुक्त ने स्वयं शिकायतकर्ता से फोन पर बात की, जिसमें सारा सच सामने आ गया। नगर आयुक्त ने इसे घोर अनुशासनहीनता, लापरवाही और नगर निगम की छवि धूमिल करने वाला कृत्य माना।
कड़ी कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- अतुल सिंह (JE): तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त करने हेतु सेवा प्रदाता कंपनी को आदेश।
- विद्या सागर (प्रभारी अधिकारी): शिथिल पर्यवेक्षण (कमजोर निगरानी) के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी।
- चेतावनी: सभी अधिकारियों को निर्देश कि निस्तारण के साथ ‘संतुष्टि प्रमाण पत्र’ अनिवार्य होगा।
नगर आयुक्त का संदेश: “जनता की सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी शिकायतकर्ता से अभद्रता करता है या झूठी रिपोर्ट लगाता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई निश्चित है।”
