नारी शक्ति वंदन अधिनियम: भारतीय लोकतंत्र के नए युग | CA नीतू सिंह

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: भारतीय लोकतंत्र के स्वर्णिम युग की शुरुआत, CA नीतू सिंह ने बताया ‘युगांतरकारी कदम’

कानपुर की प्रमुख समाजसेवी CA नीतू सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को वैश्विक लोकतंत्र के लिए एक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल सीटों का आरक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं को नीति-निर्धारक बनाने का मार्ग है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम को CA नीतू सिंह ने "गुणात्मक उत्कर्ष" बताया।
  • लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान।
  • 2029 के चुनावों से पहले क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करने की प्रतिबद्धता।
  • महिलाओं से 'प्राक्सी नेतृत्व' को छोड़कर स्वतंत्र नेतृत्व अपनाने की अपील।

कानपुर, 13 अप्रैल, 2026: जहाँ आज भी दुनिया के 101 देशों में कभी कोई महिला नेतृत्व के शिखर तक नहीं पहुँच पाई है, वहीं भारत ने अपनी मातृशक्ति को राष्ट्र की कमान सौंपने की ऐतिहासिक तैयारी कर ली है। कानपुर के सिविल लाइंस स्थित लिटिल शेफ होटल में आयोजित एक भव्य प्रेस वार्ता के दौरान समाजसेवी CA नीतू सिंह ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वाँ संविधान संशोधन) का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के “गुणात्मक उत्कर्ष” की संज्ञा देते हुए एक नए युग का शुभारंभ बताया।

वैश्विक पटल पर भारत का बढ़ता कद

नीतू सिंह ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में दुनिया के केवल 28 देशों में महिलाएँ नेतृत्व के शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे वैश्विक परिदृश्य में, जहाँ कई देशों में महिलाएँ आज भी बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं, भारत का यह निर्णय विश्व समुदाय के सामने एक ‘वैकल्पिक लोकतांत्रिक मॉडल’ प्रस्तुत करता है।”

तीन दशकों का संघर्ष और मोदी सरकार का संकल्प

इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। 1996 से चल रहे राजनीतिक संघर्ष और वैचारिक विमर्श के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इसे हकीकत में बदला है। सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि इसे 2029 के आम चुनावों से पूर्व प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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अधिनियम के प्रमुख संवैधानिक स्तंभ

CA नीतू सिंह ने प्रेस वार्ता में इस कानून के तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला:

  • अनुच्छेद 330A: लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है।
  • अनुच्छेद 332A: राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई सीटें प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 334A: यह स्पष्ट करता है कि आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद प्रभावी होगा और प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों तक लागू रहेगा।

‘प्राक्सी प्रतिनिधित्व’ की चुनौती और भविष्य की राह

पूर्व के 73वें और 74वें संशोधनों (पंचायती राज) का जिक्र करते हुए नीतू सिंह ने एक कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय निकायों में अक्सर ‘प्राक्सी प्रतिनिधित्व’ (महिला प्रतिनिधि की जगह उनके परिजनों द्वारा निर्णय लेना) देखा गया है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं को इस अवसर के अनुरूप तैयार करें, संवैधानिक व्यवस्थाओं को समझें और स्वतंत्र नेतृत्व का परिचय दें।

उपस्थिति: शहर की प्रबुद्ध मातृशक्ति का मिला समर्थन

इस प्रेस वार्ता में शहर की लगभग 65 गणमान्य महिलाएँ उपस्थित रहीं, जिनमें डॉक्टर, उद्यमी, शिक्षाविद् और अधिवक्ता शामिल थे। प्रमुख रूप से डॉ. एन.एम. निगम, प्रो. नीरू टंडन, डॉ. नीता जैन, संगीता गुप्ता, और न्यायिक क्षेत्र से पूनम शुक्ला आदि ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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