परंपरा और आधुनिकता का महामिलन: गूंजी लोकगीतों की तान - NewsKranti

परंपरा और आधुनिकता का महामिलन: गूंजी लोकगीतों की तान

कानपुर के सीएसजेएमयू में दो दिवसीय कृषि महोत्सव 'एग्रीफेस्ट-2026' का आगाज हुआ। लोकनृत्य, पारंपरिक खेल और हास्य कलाकार अनु अवस्थी की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कुलपति प्रो. विनय पाठक ने युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।

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ख़बर एक नज़र में :
  • आयोजन: एग्रीफेस्ट-2026 ‘फागुन की फुलवारी’।
  • मुख्य आकर्षण: हास्य कलाकार अनु अवस्थी और पारंपरिक ग्रामीण खेल।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुति: उत्तर प्रदेश के विविध लोकनृत्य और लोकगीत।
  • प्रदर्शनी: कृषि नवाचार, जैविक खेती और स्टार्टअप आइडियाज।
  • संदेश: आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक जड़ों का संरक्षण।

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) का परिसर शनिवार को ग्रामीण संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कृषि महोत्सव ‘एग्रीफेस्ट-2026: फागुन की फुलवारी’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस महोत्सव ने न केवल कृषि नवाचारों को प्रदर्शित किया, बल्कि विलुप्त हो रही ग्रामीण जीवन शैली और लोक कलाओं को भी जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद मंच पर लोकनृत्यों और समूह गानों की ऐसी झड़ी लगी कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। छात्रों ने धोबिया, राई और कजरी जैसे लोकनृत्यों के जरिए उत्तर प्रदेश के गांवों की सोंधी खुशबू बिखेरी।

अनु अवस्थी के ठहाकों से लोटपोट हुआ विश्वविद्यालय

महोत्सव का मुख्य आकर्षण कानपुर के चहेते हास्य कलाकार अनु अवस्थी रहे। जैसे ही उन्होंने अपनी खास कानपुरिया शैली में बोलना शुरू किया, दर्शक हंसी से लोटपोट हो गए। उन्होंने खेती-किसानी, पढ़ाई और आज की जीवनशैली पर ऐसे व्यंग्य कसे कि छात्रों से लेकर शिक्षक तक अपनी हंसी नहीं रोक पाए। अनु अवस्थी ने कहा कि “हमारी असली पहचान हमारे गांव और हमारी बोलचाल में है, इसे कभी नहीं भूलना चाहिए।”

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गिल्ली-डंडा और पिथू: जब मैदान में उतरी पुरानी यादें

एग्रीफेस्ट-2026 केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल के मैदान में भी पुरानी यादें ताजा की गईं। डिजिटल युग के युवाओं ने मोबाइल छोड़कर पिथू, गिल्ली-डंडा, कंचा और रस्साकशी जैसे पारंपरिक खेलों में अपना दम दिखाया। विश्वविद्यालय के इस नवाचार का उद्देश्य छात्रों को शारीरिक फिटनेस और अपनी मिट्टी से जुड़े खेलों के प्रति जागरूक करना था।

इसके साथ ही, कृषि प्रदर्शनी में छात्रों ने आधुनिक खेती, ऑर्गेनिक फार्मिंग और ड्रोन तकनीक के मॉडल पेश किए, जिन्हें विशेषज्ञों ने काफी सराहा।

कुलपति प्रो. विनय पाठक का संबोधन: नवाचार की नई राह

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि, “एग्रीफेस्ट केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परंपराओं को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़ने का एक पुल है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र न केवल बड़े वैज्ञानिक बनें, बल्कि उनके दिल में अपने गांवों के प्रति सम्मान और नवाचार की भावना हमेशा बनी रहे।”

विशिष्ट अतिथि आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को न छोड़ने की अपील की।

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