'अग्नि' ऐप से लोगों के बैंक खातों में लगा रहा था 'आग', हरियाणा से दबोचा गया बिहार की ठगी का मास्टरमाइंड - NewsKranti

‘अग्नि’ ऐप से लोगों के बैंक खातों में लगा रहा था ‘आग’, हरियाणा से दबोचा गया बिहार की ठगी का मास्टरमाइंड

बिहार और हरियाणा के बीच फैले एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है। आरोपी ने 'Agni App' बनाकर निवेश के नाम पर सैकड़ों युवाओं को ठगा और फरार हो गया। पुलिस ने अब उसे दबोच लिया है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • मुख्य आरोपी: संगम कुमार (निवासी: पाली, फरीदाबाद, हरियाणा)।
  • नाम का ऐप: अग्नि (Agni) ऐप।
  • ठगी का तरीका: मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान और विज्ञापन पर निवेश के नाम पर फ्रॉड।
  • ठगी की राशि: 1 करोड़ से अधिक होने की आशंका।
  • गिरफ्तारी स्थल: फरीदाबाद, हरियाणा।

मोतिहारी/पटना: डिजिटल इंडिया के दौर में ठगों ने भी खुद को ‘हाईटेक’ कर लिया है। बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले की पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने ठगी के लिए बाकायदा अपना एक एंड्रॉइड ऐप ‘अग्नि’ बना रखा था। यह मास्टरमाइंड खुद को कंपनी का CEO बताकर युवाओं को सुनहरे सपने दिखाता था और देखते ही देखते करोड़ों रुपये डकार गया।

फरीदाबाद के पाली गांव से हुई गिरफ्तारी

मोतिहारी पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से इस घोटाले के मुख्य आरोपी संगम कुमार को हरियाणा के फरीदाबाद जिले के पाली गांव से गिरफ्तार किया है। संगम ही इस पूरे फर्जीवाड़े का कर्ता-धर्ता था। वह काफी समय से पुलिस को चकमा देकर हरियाणा में छिपा बैठा था।

कैसे काम करता था ‘अग्नि’ ऐप का मायाजाल?

पुलिस पूछताछ और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ठगी का यह तरीका बेहद पेशेवर था।

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  1. लालच का जाल: ऐप के जरिए दावा किया जाता था कि मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और विज्ञापनों पर भारी रिटर्न मिलेगा।
  2. सेमिनार का आयोजन: गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में सेमिनार करते थे, जहां युवाओं को निवेश के बदले कार और महंगे उपहारों का लालच दिया जाता था।
  3. भरोसा जीतना: शुरुआत में जब कोई छोटा निवेश करता था, तो उसे ऐप के वॉलेट में मुनाफा दिखाया जाता था ताकि वह बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार हो जाए।
  4. पलायन: जैसे ही करोड़ों रुपये इकट्ठा हुए, संगम ने ऐप को अचानक बंद कर दिया और अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर फरार हो गया।

1 करोड़ से ज्यादा की ठगी का अनुमान

मोतिहारी साइबर डीएसपी अभिनव परासर के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस का मानना है कि ठगी का आंकड़ा एक करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा हो सकता है। रक्सौल के रहने वाले अभिषेक शर्मा ने पिछले साल इस संबंध में मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी थी।

पुलिस की चेतावनी: ऐप डाउनलोड करने से पहले सावधान

डीएसपी ने बताया कि संगम कुमार से पूछताछ जारी है ताकि उसके गिरोह के अन्य सदस्यों और बैंक खातों की जानकारी मिल सके। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान ऐप पर निवेश न करें और ‘जल्दी पैसा डबल करने’ वाले प्रलोभनों से बचें।

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